पूजा की आरती क्यों जरूरी है? दीये की लौ पर हाथ फेरकर आंखों से क्यों लगाते हैं? जानें धार्मिक-वैज्ञानिक सच

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पूजा के बाद आरती की लौ पर हाथ फेरकर आंखों से लगाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि नसों को एक्टिव करने, आंखों के तनाव को कम करने और मानसिक शांति देने का एक वैज्ञानिक जरिया भी है.

ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक पुरानी परंपरा मानकर करते रहते हैं. सच तो यह है कि इसके पीछे बहुत गहरा धार्मिक मतलब छिपा है. साथ ही आज का विज्ञान भी इसके पीछे का तर्क मानता है. आइए एकदम आसान भाषा में इस पूरी बात को समझते हैं.

आरती लेने की ये परंपरा आखिर है क्या? जब पूजा खत्म होती है तो भगवान की आरती उतारी जाती है. इसके बाद दीये को सभी लोगों के पास ले जाया जाता है. लोग अपनी दोनों हथेलियों को दीये की लौ पर थोड़ा ऊपर रखते हैं.

फिर उन हाथों को चेहरे और आंखों पर लगाते हैं. इसे आम भाषा में ‘आरती लेना’ कहा जाता है. ये सिर्फ एक रिवाज नहीं है. यह भगवान के प्रति श्रद्धा जताने का एक तरीका है. इस छोटे से काम से मन को बहुत सुकून मिलता है.

धार्मिक नजरिए से इसके पीछे का बड़ा कारण: धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से आरती की लौ में भगवान का तेज आ जाता है. जब हम दीये पर हाथ फेरते हैं, तो वह पवित्र ऊर्जा हमारे हाथों में आती है.

फिर जब हम हाथों को अपनी आंखों और माथे पर लगाते हैं, तो वह आशीर्वाद सीधे हमारे अंदर चला जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से हमारे अंदर की नकारात्मक सोच दूर होती है. मन में अच्छे विचार आते हैं और भगवान का दिव्य संरक्षण मिलता है.

वैज्ञानिक कारण और शरीर पर इसका असर: अब बात करते हैं इसके पीछे के विज्ञान की. जब हम जलते दीये के ऊपर हाथ रखते हैं, तो हथेलियों को हल्की गर्माहट मिलती है. हमारी हथेलियों में शरीर के कई जरूरी नसों के पॉइंट्स होते हैं.

ये गर्माहट उन नसों को जगा देती है. इसके बाद जब हम गुनगुने हाथों को आंखों पर रखते हैं, तो आंखों की मांसपेशियों को तुरंत आराम मिलता है. इससे आंखों का तनाव कम होता है और खून का दौरा बेहतर होता है.

देशी घी और कपूर का असली कमाल: पूजा में हम अक्सर कपूर या गाय के शुद्ध घी का दीया जलाते हैं. जब यह चीजें जलती हैं, तो आसपास की हवा साफ हो जाती है. दीये के धुएं और लौ में औषधीय गुण आ जाते हैं.

जब हम लौ के ऊपर हाथ फेरते हैं, तो वह शुद्ध हवा हमारे हाथों से चिपकती है. चेहरे पर हाथ लगाने से वह अच्छी ऊर्जा हमारी सांसों के जरिए अंदर जाती है. इससे आसपास के छोटे मोटे बैक्टीरिया खत्म होते हैं और दिमाग शांत होता है.

दिमाग और मन को मिलने वाली शांति: आरती के बाद यह करने से इंसान को मानसिक रूप से बहुत शांति मिलती है. दिनभर की भागदौड़ और तनाव के बाद जब हम पूजा में बैठते हैं, तो यह छोटा सा काम दिमाग को रिलैक्स कर देता है.

गर्म हाथों का स्पर्श हमारी आंखों और चेहरे को तुरंत आराम पहुंचाता है. इससे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है. इंसान खुद को ऊर्जावान महसूस करने लगता है और मन का डर खत्म हो जाता है.

इस परंपरा को सही तरीके से कैसे करें? आरती लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अपने हाथों को दीये की लौ के बहुत ज्यादा पास न ले जाएं. लौ से हाथ की थोड़ी दूरी बनाए रखें ताकि त्वचा जले नहीं.

हाथों को बस 2 से 3 सेकंड ही लौ के ऊपर रखें. इसके बाद हल्के हाथों से अपनी बंद आंखों पर लगाएं. ध्यान रहे कि आंखें खुली न रहें. इस आसान प्रक्रिया से आपको धार्मिक और शारीरिक दोनों तरह के फायदे मिलते हैं.

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