किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का साइबर कनेक्शन, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

Spread the love

पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर को गेमिंग ऐप से फंसाया जाता था. इस पर रुपए हारने के बाद लड़कों को किडनी डोनेट करने के लिए मजबूर किया जाता था. इसके बदले उन्हें 20 से 25 लाख रुपए देने का वादा किया जाता था.

मना करने पर लड़कों को अमेरिका और लंदन की रिसर्च भेजी जाती. इनमें ऐसे लोगों का जिक्र होता था, जो एक किडनी के साथ पैदा हुए और अच्छी जिंदगी जी रहे हैं.

पूरी तरह से ब्रेनवॉश करने के बाद इन लड़कों की किडनी डोनेट करा ली जाती थी. इसी पैटर्न पर आयुष की किडनी भी निकाली गई. उसका एक म्यूल बैंक अकाउंट (ऐसे खाते, जो साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं) दिल्ली के बैंक में खोला गया था। कानपुर पुलिस उसकी जांच कर रही है कि ट्रांजेक्शन कहां-कहां हुए हैं? वहीं, आज जेल में बंद एजेंट शिवम अग्रवाल के बयान दर्ज कराए जाएंगे.

डीसीपी पश्चिम कासिम आबिदी के मुताबिक पुलिस जांच में सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का सीधा संबंध साइबर अपराध की दुनिया से है.

सोशल मीडिया का इस्तेमाल: आरोपी टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर बने साइबर अपराधियों के ग्रुप के जरिए संभावित डोनर्स को खोजते और उन्हें जाल में फंसाते थे.

लालच देने का तरीका: डोनर्स को पहले छोटे-छोटे टास्क देकर उनका भरोसा जीता जाता था और उन्हें पैसे दिए जाते थे. मजबूरी का फायदा: जब व्यक्ति की पैसों की जरूरत बढ़ जाती थी, तब गिरोह के सदस्य उसे किडनी डोनर बनने के लिए भारी रकम का लालच देकर राजी करते थे.

अगली कार्रवाई: इस मामले में आरोपी शिवम का बयान दर्ज करने के लिए Investigating Officer रवाना हो चुके हैं. इसके बाद शिवम की Police custody remand के लिए कोर्ट में अर्जी दी जाएगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *