लखनऊ में पीजीआई की एसोसिएट प्रोफेसर से 2 करोड़ की धोखाधड़ी करने के मामले में आखिरकार STF को सफलता मिली है. मामले में STF की टीम ने एक महिला समेत 3 शातिरों को गिरफ्तार किया गया है. डिजिटल अरेस्टिंग करने वाले गिरोह का आखिरकार पर्दाफाश हो गया है. दरअसल, कुछ समय पहले ही SGPGI की डॉक्टर से इस गिरोह ने फर्जी सीबीआई ऑफिसर बनकर एक हफ्ते तक डिजिटल अरेस्ट किया और 2 करोड़ की ठगी की थी.
बनते थे फर्जी अधिकारी बनते थे
अब आखिरकार STF ने ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है. हरिप्रिया प्रधान,जितेंद्र यादव, ज्ञानचंद्र की गिरफ्तारी की गई है. ये सभी आरोपी कभी ED तो कभी CBI अधिकारी बनते थे और फिर ठगी करते थे. अब ये सभी STF के हत्थे चढ़ चुके हैं. इन सभी के बैंक खाते समेत वॉलेट की जानकारी STF द्वारा जुटाई जा रही है.
STF की टीम गिरोह के तीनों सदस्यों को लखनऊ से अरेस्ट कर स्थानीय थाने के सुपुर्द कर दिया है. पीजीआई की डॉक्टर को मनी लॉन्ड्रिंग और नेशनल सिक्योरिटी का डर दिखाकर ठगों ने नया फोन खरीदने को मजबूर कर दिया. फिर उसके जरिए करोड़ों रुपये सरकारी खाता बताकर अपने अकाउंट में डलवा लिये.
साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए ऐसे-ऐसे कहानी बुन रहे हैं, जिसके खौफ में अच्छे से अच्छा पढ़े-लिखे जानकार लोग फंस जा रहे हैं. पिछले महीने अगस्त में ऐसा ही मामला लखनऊ से सामने आया था. यहां पीजीआई की डॉक्टर से को मनी लॉन्ड्रिंग और नेशनल सिक्योरिटी का डर दिखाकर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया. फिर उनसे 2 करोड़ रुपये ठग लिये थे.















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