पश्चिम बंगाल की राजनीति में घमासान जारी है और अब यह हकीकत बनती जा रही है कि TMC टुकड़े-टुकड़े हो गयी है जिसमें पंचायत से लेकर संसद तक बगावत की आग फ़ैल चुकी है. ताजा जानकारी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) में विधायकों की बगावत के बाद अब संसदीय दल में भी बहुत बड़ी टूट हो चुकी है. टीएमसी के करीब 20 बागी सांसदों का गुट आज लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से व्यक्तिगत मुलाकात कर सकता है. कल ही इन सांसदों ने मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन स्पीकर के दिल्ली से बाहर होने के कारण यह बैठक नहीं हो पाई थी. आज होने वाली इस मुलाकात के बाद संसद के भीतर की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी.
इधर बंगाल विधानसभा में TMC की दरार 19 मई को हुई बैठक के बाद से ही दिखने लगी थी. 80 में से करीब 60 विधायकों ने ममता बनर्जी वाले गुट से अलग पहचान बनाकर नेता प्रतिपक्ष का पद हथिया लिया है. ऋतब्रत बनर्जी बागियों के नेता बन गए हैं.

पार्टी बंगाल से लेकर दिल्ली तक, ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है. पंचायत से लेकर संसद तक, हर स्तर पर बगावत की आग भड़क चुकी है और दीदी का साथ देने वाले पुराने और भरोसेमंद चेहरे एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं. पार्टी में हर स्तर पर भारी असंतोष है. नतीजे में तृणमूल कांग्रेस का यह मजबूत किला हर स्तर पर ढहता जा रहा है.
बता दें कि ये बगावत उस वक्त हुई है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्ष के ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली में मौजूद हैं. राजनीति के जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी की स्थिति अब महाराष्ट्र के शरद पवार या उद्धव ठाकरे जैसी हो गई है, जिनकी पूरी पार्टी ही उनके हाथों से फिसल गई थी.

शताब्दी रॉय के घर आधी रात को जुटी महफिल: सियासी गलियारों में कल दिनभर टीएमसी के दो और सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए भारी कसरत चलती रही. इसके बाद कल देर रात बागी सांसद शताब्दी रॉय के दिल्ली आवास पर एक बेहद गोपनीय और बड़ी बैठक हुई. इस बैठक के बीच में बीजेपी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी भी वहां पहुंचे, जिसके बाद कयासों का बाजार और गर्म हो गया है. बागी सांसदों ने पहले ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग बैठने की जगह मांगी है. सांसदों ने अपने पत्र में साफ-साफ कहा है कि वे अब नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) का हिस्सा बनना चाहते हैं.
पीछे से साफ हो गई पार्टी: इस पूरी बगावत का सबसे दिलचस्प और दर्दनाक पहलू ये है कि जब शनिवार को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता का दम भर रहे थे, ठीक उसी वक्त उनकी अपनी पार्टी के सांसद उनका साथ छोड़ रहे थे. अभिषेक बनर्जी को इस बगावत की भनक पहले ही लग गई थी, इसलिए वे संभावित टूट को रोकने के लिए ममता बनर्जी से भी पहले दिल्ली पहुंचे थे. शनिवार शाम को खुद ममता बनर्जी भी दिल्ली लैंड कर गईं, लेकिन दोनों नेताओं का पूरा डैमेज कंट्रोल फेल साबित हुआ. इस महा-टूट ने राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत को बहुत कम कर दिया है.















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