फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया. उन्होंने कहा कि आज विकास को केवल GDP और व्यापारिक आंकड़ों से नहीं आंका जाना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया को ये सोचने की जरूरत है कि विकास आखिर किसके लिए हो रहा है, किसके साथ हो रहा है और उसकी दिशा क्या है. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया आर्थिक असमानता, जलवायु संकट और भू-राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है.
प्रधानमंत्री मोदी ने G7 के आउटरीच सत्र में हिस्सा लिया, जिसका विषय था ‘सभी के लिए संतुलित, शेयर और टिकाऊ आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करना’. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संबोधन की प्रमुख बातें साझा कीं. पीएम मोदी ने फ्रांस की अध्यक्षता की सराहना करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय को सम्मेलन के केंद्र में रखना समय की मांग है. उन्होंने बताया कि विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़ों को बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक उसका लाभ पहुंचाना होना चाहिए.
GDP पर क्यों उठाए सवाल? प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक आर्थिक सोच को चुनौती देते हुए कहा कि विकास को केवल जीडीपी वृद्धि या व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता. उन्होंने आगे कहा अगर विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तो उसकी सफलता अधूरी मानी जाएगी. उन्होंने वैश्विक नीति निर्माताओं से आग्रह किया कि वे आर्थिक प्रगति को इंसान-केंद्रित नजरिए से देखें. पीएम मोदी का यह संदेश विकास के नए मॉडल की ओर संकेत करता है, जिसमें समानता और साझेदारी को प्राथमिकता दी जाती है.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत लगातार समावेशी और न्यायसंगत वैश्विक विकास की वकालत करता रहा है. उन्होंने दोहराया कि भारत की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की सोच “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत पर आधारित है. यानी पूरी दुनिया एक परिवार है. इसी सोच के तहत भारत विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाता रहा है. उनका मानना है कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सहयोग और विश्वास से ही संभव है.
प्रधानमंत्री मोदी ने किन पहलों का किया जिक्र? अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की कई वैश्विक पहलों का उल्लेख किया. इनमें इंटरनेशनल सोलर एलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन LiFE और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ये सभी पहल मानवता और पर्यावरण को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं. भारत का प्रयास है कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित किया जाए और दुनिया को टिकाऊ भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाया जाए.
किन नेताओं से होगी मुलाकात? G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहा. वे यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ त्रिपक्षीय बैठक करेंगे. इसके अलावा उनकी जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता तय है. सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है. भारत इन चर्चाओं में एक प्रमुख साझेदार देश के रूप में भाग ले रहा है.
ट्रंप से मुलाकात क्यों अहम? G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक पर भी दुनिया की नजरें टिकी हैं. दोनों नेता व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं. इससे पहले दोनों नेताओं ने सम्मेलन में मुलाकात कर हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की. पिछले 16 महीनों में यह उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात है. ऐसे में यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.














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