इंदौर के घनश्याम ने पत्नी की मौत के बाद अकेले अपने 4 बच्चों की परवरिश की, लेकिन जीवन के अंतिम साल उन्हें भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में रहना पड़ा. निधन के बाद उनका शव दो दिन तक अपनों का इंतजार करता रहा, लेकिन उनके बच्चे अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचे. आखिकार समाजसेवियों और वृद्धाश्रम से जुड़े लोगों ने उनका अंतिम संस्कार किया.
घनश्याम मालवीय पिछले करीब 1.5 साल से अपना घर वृद्धाश्रम में रह रहे थे. पंचर और टायर-ट्यूब का काम करके उन्होंने जिंदगी गुजारी. इसी मेहनत की कमाई से चार बच्चों को पाला-पोस कर बच्चों को बड़ा किया. इंदौर के पंचवटी कॉलोनी में अपना मकान बनाया, लेकिन जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर वही पिता बच्चों से दूर इस वृद्धाश्रम में रह गए. फिर आया 4 अगस्त बुजुर्ग घनश्याम की मौत हो गई. वृद्धाश्रम के लोगों ने परिवार को खबर दी. उम्मीद थी कि बच्चे आएंगे पिता की अंतिम विदाई करेंगे. लेकिन एक दिन बीत गया, फिर दूसरा दिन भी बीता और वृद्धाश्रम में बुजुर्ग घनश्याम का शव बच्चों के इंतजार में रखा रहा.
हमेशा गुमशुम रहते थे घनश्याम: अपना घर वृद्धाश्रम की संचालिका माधुरी मिश्रा का कहना है कि जब घनश्याम मालवीय की मौत हुई तो इसकी जानकारी उन्होंने उनके परिवार के एक सदस्य को दी जिसका नाम सुभाष है. संचालिका ने जब उनसे फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि उनसे उनका कोई रिश्ता नहीं है और आगे कभी इस चीज के लिए उन्हें फोन ना करें. घनश्याम मालवीय के साथ रहने वाले कुछ बुजुर्गों से जब हमने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वह काफी गुमशुम रहा करते थे. बहुत कम बात करते थे, साथी अपने परिवार के बारे में भी कोई जानकारी नहीं देते थे. एक बुजुर्ग उनको हमेशा गाना सुनाया करते थे, लेकिन अपने पुराने अतीत के बारे में कभी चर्चा नहीं करते थे.
समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार: शायद घनश्याम की कोई आखिरी इच्छा रही हो कि जिंदगी में बच्चे पास नहीं रहे, तो कम से कम आखिरी वक्त में उनका चेहरा देखने जरूर आएंगे, लेकिन दो दिन तक इंतजार के बाद भी कोई नहीं आया और आखिरकार जिनसे कोई खून का रिश्ता नहीं था. वही लोग उनके अपने बनकर खड़े हुए. समाजसेवियों और वृद्धाश्रम से जुड़े लोगों ने उनका अंतिम संस्कार किया.
















Leave a Reply