हो गया अमेरिका-ईरान का शांति समझौता, ट्रंप ने चिल्लाकर कहा-‘कर दिए साइन’

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करीब साढ़े तीन महीने तक चले तनाव और सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं. अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी सरकार दोनों ने इसकी पुष्टि की है. इस समझौते को पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लंबे समय से जारी अस्थिरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि, दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने के बावजूद असली चुनौती अब इसके लागू होने की होगी. दोनों देशों को अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम और व्यापक समझौते की शर्तों पर बातचीत करनी है.

अमेरिकी न्यूज एजेंसी AFP के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की प्रति पर हस्ताक्षर किए हैं. यह हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय पैलेस में आयोजित एक डिनर कार्यक्रम के दौरान हुआ. इससे पहले अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी की गई.

ईरान ने भी माना, अब अमल करने की बारी: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA से बातचीत में कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ का मसौदा अंतिम रूप ले चुका है. बकाई ने कहा कि अब सबसे महत्वपूर्ण चरण इसकी वास्तविक और प्रभावी क्रियान्वयन प्रक्रिया होगी. उनका संकेत इस ओर था कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर भर से शांति स्थापित नहीं होती, बल्कि तय शर्तों का पालन ही समझौते की सफलता तय करेगा.

क्या है ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’? समझौते का आधिकारिक नाम ‘संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ रखा गया है. दस्तावेज के अनुसार दोनों पक्ष सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमत हुए हैं. इसमें लेबनान से जुड़े सैन्य अभियानों का भी उल्लेख किया गया है. अमेरिका ने इस समझौते के तहत अमेरिका ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने का आश्वासन दिया है:

➤ईरान पर लागू नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर हटाया जाएगा.
➤समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर पर बहाल करने की कोशिश होगी.
➤अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के आसपास तैनात अपनी सैन्य उपस्थिति को वापस लेगा.

ईरान की जिम्मेदारी क्या होगी?

➤दस्तावेज के मुताबिक ईरान भी कुछ प्रतिबद्धताएं निभाएगा.
➤वह व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपने स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं करेगा.
➤अगले 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.
➤समुद्री मार्गों को सामान्य बनाने में सहयोग किया जाएगा.

जिनेवा बैठक अभी भी तय: औपचारिक हस्ताक्षर कार्यक्रम मूल रूप से शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होना था. हालांकि दस्तावेज़ पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं, फिर भी ईरान ने स्पष्ट किया है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी. विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक में दोनों देश अंतिम समझौते की विस्तृत शर्तों, निगरानी तंत्र और सुरक्षा प्रावधानों पर चर्चा कर सकते हैं.

110 दिन पुराने युद्ध का अंत: यह समझौता उस संघर्ष के बाद सामने आया है जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से हुई थी. इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया और कई बार व्यापक युद्ध की आशंका भी जताई गई. करीब 110 दिनों तक चले इस संघर्ष ने क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया. ऐसे में यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक पहल माना जा रहा है.

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