कानपुर में चल रही फर्जी डिग्रियों की ‘फैक्ट्री’ पर छापा, खुले 25 राज्यों तक फैले सिंडीकेट के राज

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पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की एसआईटी और फीलखाना थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र तैयार कर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का शुक्रवार दोपहर 3.30 बजे खुलासा किया। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है. उनके कब्जे से विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षा बोर्डों के नाम पर तैयार की गई 59 फर्जी मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन और प्रोविजनल सर्टिफिकेट, चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 4.53 लाख रुपए नकद बरामद हुए हैं. पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि यह गिरोह 25 राज्यों तक फैला हुआ है.

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि फीलखाना में छापेमारी करके फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट बनाने वाले एक और गिरोह का खुलासा हुआ है. यह गिरोह सिर्फ यूपी ही नहीं, दिल्ली, मुंबई समेत कई राज्यों तक फैला हुआ है. कानपुर की फीलखाना पुलिस और एसआईटी ने ज्वाइंट छापेमारी करके बर्रा-2 ईडब्ल्यूएस कॉलोनी निवासी 35 वर्षीय अमित सक्सेना और न्यू सिविल लाइन्स, गुरूदेव टाकिज के पीछे विनायकपुर निवासी 38 वर्षीय गोपाल को अरेस्ट कर लिया. गोपाल मूलरूप से कालपी जालौन और अमित सक्सेना मूल रूप से इटावा निवासी है.

इनके पास से 59 फर्जी मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट बरामद किये गये और लाखों के मोबाइल भी जब्त किये गए. उन्होंने बताया कि फर्जी डिग्री का यह काला कारोबार पिछले 10 साल से चल रहा था जो एक सटीक नेटवर्क के जरिये हजारों युवाओं तक पहुंचता था. पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने आगे बताया कि गिरोह का सरगना पहले भी जेल जा चुका है और बाहर आते ही उसने फिर शुरू कर दिया खेल.

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