संत रविदास नगर कहलाएगा यूपी का भदोही जिला… वाराणसी से सीएम योगी का बड़ा ऐलान

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को वाराणसी पहुंचे. यहां सीएम योगी ने भदोही जिले का नाम बदलने का ऐलान किया. सीएम योगी ने कहा कि भदोही जिला फिर से संत रविदास नगर नाम से जाना जाएगा. बता दें कि पहले भी भदोही जिले का नाम संत रविदास नगर था. बाद में इसे भदोही कर दिया गया था. अब एक बार फिर से सीएम योगी ने भदोही का नाम बदलकर सं​त रविदास नगर कर दिया है.

सपा सरकार में बदला गया था नाम: बता दें कि दिसंबर 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी से सटे संत रविदास नगर जिले का नाम बदलकर भदोही कर दिया था. सपा सरकार के इस फैसले को लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने नाराजगी जाहिर की थी. बसपा प्रमुख मायावती ने साल 1997 में भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया था. 2014 में सपा सरकार ने संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही कर दिया था.

योगी सरकार का बड़ा दांव: अब 12 साल बाद योगी सरकार द्वारा फिर से भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया. योगी सरकार का ये बड़ा दांव माना जा रहा है. यूपी में 2027 चुनाव से पहले बीजेपी दलितों को साधने में जुट गई है. यही वजह है कि बीजेपी ने संत रविदास जी महाराज के 650वें जयंती वर्ष पर दलितों को बड़ा तोहफा दी है. इतना ही नहीं योगी सरकार ने वाराणसी से समरता और संकल्प अभियान की शुरुआत भी कर दी है.

1994 में अस्तित्व में आया था जिला: गौरतलब हो कि 30 जून 1994 को यह जिला मूल रूप से भदोही नाम से अस्तित्व में आया था. इसके बाद से सपा और बसपा समय समय पर नाम बदलते रहे. अब पहली बार योगी सरकार ने भदोही को संत रविदास नगर कर दलितों को बड़ा तोहफा दी है. संत शिरोमणि कवि रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा को 1376 ईस्वी को यूपी के वाराणसी जिले के गोबर्धनपुर गांव में हुआ था. उनकी माता का नाम कर्मा देवी और पिता का नाम संतोख दास था.

अपने दोहों से जातिगत भेदभाव दूर किया: संत रविदास जी के बारे में कहा जाता है कि वह बहुत ही दयालु और दानवीर थे. संत रविदास अपने दोहों के माध्यम से समाज में जातिगत भेदभाव को दूर कर सामाजिक एकता पर बल दिया. इतना ही नहीं उन्होंने अपने दोहों से ही मानवतावादी मूल्यों की नींव भी रखी. संत रविदास स्वामी रामानंदाचार्य के शिष्य थे. संत रविदास को लेकर कहा जाता है कि वह कबीर के समकालीन व गुरुभाई थे.

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