हर साल कन्या संक्रांति पर सृष्टि के वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा का विधान बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा से करियर-कारोबार से जुड़े लाभ में वृद्धि होती है. खासतौर से जिन लोगों की पेशे में खास तरह के उपकरण, औजार या मशीनों का प्रयोग होता है, उनके लिए यह दिन खास महत्व रखता है.
हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन दुनिया के पहले वास्तुकार, शिल्प के देवता भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था. माना जाता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा और मशीनों-औजारों, गाड़ियों की पूजा करने से कामकाज से जुड़ी दिक्कतें दूर होती हैं, साथ ही करियर-व्यापार संबंधी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इंजीनियर्स-आर्किटेक्ट्स के लिए यह दिन विशेष होता है.
आइए जानते हैं कि आज भगवान विश्वकर्मा की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला और इनकी पूजा की सही विधि क्या है.
विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:58 बजे से सुबह 06:44 बजे तक.
सुबह का मुहूर्त – सुबह 06:21 बजे से सुबह 07:30 बजे तक.
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 01:20 बजे से दोपहर 02:10 बजे तक.
विजय मुहूर्त- दोपहर 03:50 बजे से शाम 04:40 बजे तक.
गोधूलि और रात्रि मुहूर्त- शाम 07:59 बजे से रात 09:09 बजे तक.
विश्वकर्मा पूजा पर शुभ योग
इस साल विश्वकर्मा पूजा के दिन 2 शुभ योग बन रहे हैं. पहला,
सर्वार्थ सिद्धि योग और दूसरा रवि योग. सर्वार्थ सिद्धि योग 17 सितंबर की सुबह 07:30 बजे से शाम 04:23 बजे तक रहेगा. वहीं रवि योग सुबह 07:30 बजे से शाम 04:23 बजे तक है.
राहुकाल में पूजा से बचें: आज दोपहर 01:48 बजे से लेकर दोपहर 03:20 बजे तक राहुकाल रहेगा. इस अवधि में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए.
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा? भगवान विश्वकर्मा को संसार का पहला वास्तुकार और शिल्पकार माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विश्वकर्मा ने चारों युगों में अद्भुत नगरों और महलों की रचा की थी. रावण की सोने की लंका हो या द्वारका नगरी, रावण का पुष्पक विमान हो या स्वर्ग लोक, इन सभी के निर्माता भगवान विश्वकर्मा ही माने जाते हैं.
विश्वकर्मा पूजा की सामग्री विश्वकर्मा पूजा के लिए कुछ खास चीजों का प्रबंध कर लें. भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति, लकड़ी की चौकी, घी, इत्र, रोली, चंदन, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, कपूर, जनेऊ, गंगाजल, कलश, फल, फूल, मिठाई, नारियल, अक्षत यानी चावल और कलावा शामिल हैं.
विश्वकर्मा जी की पूजन विधि: सुबह जल्दी स्नानादि के बाद कार्यस्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करके स्थान को शुद्ध करें. अब पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. इस कपड़े पर अष्टदल कमल बनाकर कलश स्थापित करें. इसके साथ भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर भी रखें. इसके बाद कार्यस्थल पर मौजूद मशीनों, औजारों और अन्य यंत्रों की पूजा करें. इन सभी पर रोली, चंदन और हल्दी लगाएं. फिर धूप और दीप जलाकर भगवान विश्वकर्मा की आरती करें. पूजा के अंत में भगवान विश्वकर्मा को फल, फूल और मिठाई का भोग लगाएं. पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद ग्रहण करें और परिवार के सदस्यों या वहां मौजूद लोगों में प्रसाद वितरित करें.
विश्वकर्मा भगवान की आरती
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
















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