अगले माह नवंबर का पहला प्रदोष व्रत इस बार 6 तारीख को धनतेरस के दिन रखा जाएगा. शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा. इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की आराधना का भी विशेष संयोग बन रहा है. ऐसे में धनतेरस पर शिव कृपा पाने का खास अवसर माना जा रहा है. अगर आप भी प्रदोष व्रत रखते हैं, तो जान लें इसकी सही तारीख, महादेव की आराधना का शुभ मुहूर्त क्या है.
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. यह व्रत हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी. प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को होने के कारण व्रत इसी दिन रखा जाएगा.
पूजा का शुभ मुहूर्त: 6 नवंबर को प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक (2 घंटे 37 मिनट) का समय बताया गया है. इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक है. निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.
धनतेरस पर शिव पूजा: इस बार शुक्र प्रदोष व्रत के दिन धनतेरस का भी संयोग है. इस अवसर पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना भी की जाएगी.
प्रदोष व्रत का महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होने मान्यता है.
प्रदोष व्रत पूजा विधि: प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिव जी के सामने व्रत का संकल्प लें. शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और फूल अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर शिव के मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा पढ़ें या सुनें. अंत में शिवजी की आरती करें और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें.
















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