कानपुर के भौती हाईवे पर सोमवार की सुबह PSIT के चार छात्र समेत पांच लोगों की मौत के बाद मंगलवार को सभी का अंतिम संस्कार एक साथ ड्योढ़ी घाट पर किया गया. इस दौरान चारों की अर्थी जब एक साथ उठी तो सभी का दिल दहल गया. मानो ऐसा लग रहा था जैसे लोगों का कलेजा मुंह पर आ गया हो. क्षेत्र का ऐसा भयावक नजारा देखकर सभी के चेहरों में एक दहशत का नजारा देखने को मिला. हर कोई यह कहता दिखाई दिया की ऐसा तो कभी देखा ही नहीं.

बेटे का शव उठते ही पिता हुए बेहोश
प्रतीक का शव जैसे ही उठाया गया तो यह नजारा देख पिता राजेश सिंह गस खाकर वहीं गिर पड़े. इसके बाद किसी तरह से रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला और फिर उन्हें लेकर आगे बढ़े. बेटे की अर्थी के पीछे चलना पिता राजेश के लिए एक-एक कदम भारू पड़ रहा था. किसी तरह से लोग उन्हें सांत्वना दे रहे थे.
गरिमा की मां को संभालती रही उनकी छोटी बेटी

गरिमा का शव जैसे ही घर से उठाया गया तो वैसे-वैसे उसकी मां रीता त्रिपाठी भी पीछे-पीछे दौड़ने लगी. उन्हें देख वहां मौजूद परिवार की अन्य महिलाओं ने तुरंत ही उनको संभाला. इसके बाद परिवार की छोटी बेटी महिमा ने अपनी मां को सहारा दिया और उन्हें गले लगा कर चिपका लिया.
जैसे ही गरिमा का शव गाड़ी में रखकर जाने लगा तो मां की चीख निकल पड़ी और अचानक से वह बेहोश हो गई. यह देख महिलाओं का भी दिल दहल गया. तुरंत ही उनको पानी की छीट मारी गई और पानी पिलाया गया. इसके बाद सभी लोग मां को लेकर वापस घर की तरफ आ गए.
सतीश की मां थी बदहवाश
सतीश की मां संतोष कुमारी और पिता रमेश चंद्र बेटे के शव के पास ही बैठे रहे. कभी बेटे को देख कर चीख-चीखकर रोने लगते थे तो कभी गुमशुम से बैठ जाते थे. घंटो बैठे-बैठे बेटे के शव को निहारते रहते थे, जैसे ही बेटे को ले जाने की तैयारी शुरू हुई तो पिता बदहवास होकर सीना पीट-पीटकर रोने लगे.
पति के शव से लिपटी रही सुमन

ड्राइवर विजय साहू के शव को ले जाने के लिए जैसे ही तैयारी शुरू हुई तो पत्नी सुमन अपने पति के शव से लिपट गई. वहीं, दोनों बेटे हिमांशु और शशांक को परिवार के अन्य लोग उन्हें सहारा दे रहे थे. वहीं, जब पिता का शव उठा तो पत्नी और दोनों बेटे चीख चीखकर रोने लगे। ये नजारा देख सभी के आंखों में आंसू छलक पड़े.
आयुषी के शव से लिपट गई मां
आयुषी का शव जैसे ही उठा तो मां समता बेटी के शव से लिपट गई. पिता नरेश पटेल दूर बैठकर बेटी के शव को निहार रहे थे और अपनी किस्मत को कोश रहे थे, जैसे ही बेटी का शव उठा तो रामनरेश के मुंह से निकल पड़ा ‘ये कैसा दिन आ गया आज’ इसके बाद सभी लोग नरेश को सहारा देने लगे.
















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