‘सत्ताईस के सत्ताधीश बनाम सत्ताईस के खेवनहार…’ अखिलेश की होर्डिंग को संजय निषाद का जवाब

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विधानसभा की नौ सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों के बीच 2027 के चुनाव को लेकर पोस्टर वार तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव के जन्मदिन पर पार्टी कार्यालय के बाहर सत्ताईस का सत्ताधीश लिखे पोस्टर नजर आए तो वहीं अब सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने नेता संजय निषाद को सत्ताईस का खेवनहार बता दिया है. ये पोस्टर लखनऊ में यूपी बीजेपी मुख्यालय के बाहर लगाए गए हैं जिनमें डॉक्टर संजय निषाद को ‘सत्ताईस का खेवनहार’ बताया गया है.

मालूम हो कि लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर एक दिन पहले एक होर्डिंग लगायी गयी थी जिसमें सपा मुखिया अखिलेश यादव को ‘सत्ताईस का सत्ताधीश’ बताया गया है. इसे संत कबीर नगर के सपा नेता जयराम पांडे ने लगवायी है.

निषाद पार्टी की ये होर्डिंग चर्चा का विषय बनी हुई है. उपचुनाव में निषाद पार्टी दो सीटें मांग रही थी. निषाद पार्टी मिर्जापुर जिले की मझवां और अंबेडकरनगर की कटेहरी सीट मांग रही थी. इन दोनों सीटों से 2022 के चुनाव में पार्टी ने उम्मीदवार उतारे थे. बीजेपी ने निषाद पार्टी को कोई सीट नहीं दी है. सपा की होर्डिंग के बाद अब उपचुनाव में मैदान में से बाहर चल रही निषाद पार्टी की भी होर्डिंग वार में एंट्री ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि यह बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगाई गई है.

यूपी बीजेपी प्रदेश कार्यालय के बाहर लगी होर्डिंगनिषाद पार्टी एनडीए में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है और होर्डिंग में ऊपर एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ ही गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तस्वीरें भी लगाई गई हैं. इसी होर्डिंग पर दूसरी तरफ यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की भी तस्वीरें लगी हैं. निषाद पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय सिंह की तस्वीर भी इस होर्डिंग पर है. होर्डिंग देखने से ऐसा लग रहा है कि इसे अजय सिंह या उनके किसी समर्थक ने लगवाया होगा.

होर्डिंग में ऊपर जय निषाद राज-जय श्रीराम भी लिखा हुआ है. ये होर्डिंग ऐसे समय में लगाया गया है जब यूपी की नौ विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. जिन नौ सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें से दो सीटें ऐसी हैं जहां 2022 के चुनाव में निषाद पार्टी ने उम्मीदवार उतारे थे. हालांकि, पार्टी दोनों ही सीटों पर हार गई थी. बीजेपी ने सहयोगी आरएलडी के लिए मीरापुर सीट छोड़ी है लेकिन दिल्ली में डेरा डालने के बावजूद संजय निषाद को खाली हाथ ही लखनऊ लौटना पड़ा था. इसके बाद से ही बीजेपी और संजय निषाद की पार्टी में अनबन की चर्चा भी है.

बीजेपी कार्यालय के बाहर लगे इस होर्डिंग को दोनों दलों के बीच ‘ऑल इज वेल’ का संदेश देने की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है. मझवां और कटेहरी में निषाद पार्टी का आधार भी मजबूत माना जाता है. ऐसे में नाराजगी की खबरें कहीं नुकसान न पहुंचे दें, होर्डिंग को इसी नुकसान की आशंका को शून्य करने की कोशिश बताया जा रहा है. 

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