ये स्वाभिमान की लड़ाई है… मेरा सियासी करियर खत्म नहीं हुआ, आकाश आनंद की आयी पहली प्रतिक्रिया

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UP की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर समेत तमाम पदों से हटाए जाने के 24 घंटों के भीतर उनकी प्रतिक्रिया सामने आई है. आकाश आनंद ने अपनी प्रतिक्रिया में अपने राजनीतिक भविष्य और मायावती को लेकर तमाम बातें कहीं हैं.

आकाश आनंद ने मायावती के फैसले के प्रति पूरा सम्मान दिखाया. उन्होंने कहा, मैं मायावती जी का कार्यकर्ता हूं और उनकी अगुवाई में ही पार्टी के लिए त्याग-समर्पण और निष्ठा का पाठ मैंने सीखा है. ये सभी बातें सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि उनके पूरे जीवन का मकसद है. बहनजी का फैसला मेरे लिए पत्थर की लकीर है. उनके फैसले का सम्मान है और उसके साथ खड़ा हूं. मायावती जी उन्हें पार्टी के सभी पदों से हटाने का फैसला मेरे लिए निजी तौर पर भावनात्मक है. हालांकि यह एक बड़ी चुनौती भी है और कठिन परीक्षा भी है. लंबी लड़ाई है. कठिन वक्त में धैर्य और संकल्प के साथ ही आगे बढ़ा जा सकता है.

बहुजन मिशन और आंदोलन के एक सच्चे कार्यकर्ता की तरह बसपा के लिए वो पूरी निष्ठा से काम करते रहेंगे. आखिरी सांस तक बहुजन समाज के हक की लड़ाई लड़ी जाएगी.कुछ विपक्षी दल अगर सोच रहे हैं कि बसपा के फैसले से उनका राजनीतिक करियर खत्म हो गया है तो वो गलतफहमी में हैं. उन्हें समझना चाहिए कि बहुजन आंदोलन कोई करियर नहीं हैं. यह करोड़ों दलितों- शोषितों और वंचितों के सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई है. इस विचार और आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता.

गौरतलब है कि मायावती ने लखनऊ में रविवार को बहुजन समाज पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी. इसमें उन्होंने बसपा में उनके उत्तराधिकारी माने जा रहे भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था. इसके पहले आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला गया था. कभी अशोक को मायावती का सबसे खासमखास माना जाने लगा था. वो एमएलसी और राज्यसभा सांसद भी रहे.

आकाश आनंद का पांच साल पहले शुरू हुआ राजनीतिक करियर उतार चढ़ाव भरा रहा है. कभी भरे मंच पर मायावती ने आकाश आनंद के सिर पर हाथ रखा था, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में जब आकाश आनंद ने तेवर दिखाए तो अचानक उन्हें प्रचार से दूर रहने का फरमान मायावती ने सुना दिया.

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