संकष्टी चतुर्थी आज: अलग-अलग परेशानियों से मुक्ति के लिये करें ये उपाय, मिलेगी गणेश कृपा

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आज 17 मार्च को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा.  चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश के निम्मित व्रत रख रात को चंद्रोदय के समय व्रत का पारण किया जाता है. बता दें कि प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का विधान है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है.  संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली. भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं. इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है.

कहते हैं कि जो व्यक्ति संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है.  इसके अलावा इस दिन शुभ फलों की प्राप्ति के लिए और जीवन में सभी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए आपको कौन से उपाय करने चाहिए इसे जानिए-

नौकरी की तलाश: अगर आप किसी अच्छी कंपनी में नौकरी की तलाश में हैं, तो संकष्टी चतुर्थी के दिन स्नान आदि के बाद घी में बेसन भूनकर या किसी और से भुनवाकर, उसमें पिसी हुई शक्कर मिलाकर प्रसाद तैयार कर लें. फिर भगवान को नमस्कार करके उस प्रसाद का भोग लगाएं. साथ ही भोग लगाने के बाद भगवान श्री गणेश की मूर्ति की तीन बार परिक्रमा करें. अगर मूर्ति के आस-पास इतना स्पेस न हो तो श्री गणेश का ध्यान करते हुए अपने स्थान पर ही तीन परिक्रमा कर लें.

खुशहाल दांपत्य जीवन: अगर आपके दांपत्य जीवन में खुशियों की जगह परेशानियों ने ले ली है, तो अपने सुखी दांपत्य जीवन के लिए संकष्टी चतुर्थी के दिन श्री गणेश का पूजन करके हवन करें. आप चाहें तो किसी योग्य पंडित जी से हवन करा सकते हैं और अगर आपका इतना सामर्थ्य नहीं है तो आप स्वयं भी गाय के गोबर से बने कंडे पर 108 बार आहुति देकर घर में छोटा-सा हवन कर सकते हैं.

असफलता: अगर आपको किसी भी काम में मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिल पा रही है तो अपने कामों में सफलता सुनिश्चित करने के लिए संकष्टी चतुर्थी के दिन गणपति जी के इस सफलता प्राप्ति मंत्र का जप करें. मंत्र है- ‘गं गणपतये नमः’ इस मंत्र का 11 बार जप करें और हर बार मंत्र बोलने के बाद भगवान को पुष्पांजलि अर्पित करें.

स्वास्थ्य संबंधी :अगर आपके परिवार के किसी सदस्य की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही है, तो संकष्टी चतुर्थी के दिन 3 गोमती चक्र, 11 नागकेशर के जोड़े और 7 कौड़ियां एक सफेद रंग के कपड़े में बांधकर जिस व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब है उस व्यक्ति के सिर के ऊपर से 6 बार क्लॉक वाइज और एक बार एंटी क्लॉक वाइज वारकर श्री गणेश के मंदिर में चढ़ा दें.

शत्रु संबंधी: अगर आपका शत्रु आपको बहुत ज्यादा परेशान कर रहा है और आपके कामों में बाधा गा डाल रहा है, तो शत्रु से छुटकारा पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी के दिन बाजार से एक पान का पत्ता लेकर आयें और उस पान के पत्ते को अच्छे से साफ करके, उस पर हल्दी से सातिया, यानि स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर भगवान गणेश को अर्पित करें और अपने शत्रु का नाम लेते हुए, उससे छुटकारा पाने के लिएभगवान से प्रार्थना करें.

प्यार, पैसा और शोहरत: अगर आप प्यार, पैसा और शोहरत, ये तीनों चीज़ें अपनी जिंदगी में एक साथ पाना चाहते हैं, तो संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश के इस मंत्र का जप करें। मंत्र आप नोट भी कर सकते हैं. मंत्र है-‘हस्तिपिशचिलिखे स्वाहा’ भगवान गणेश के इस मंत्र का 51 बार जप करें।

करियर: अगर आप अपने करियर में दिनों-दिन सफलता पाना चाहते हैं, तो उसके लिए संकष्टी चतुर्थी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर एक लोटा जल लें और उस जल में दुर्वा डालकर भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने रख दें. फिर विधि-पूर्वक भगवान की पूजा करें. पूजा के बाद उस पानी के लोटे को ढंककर वहीं भगवान श्री गणेश के सामने रखा रहने दें और शाम के समय जब चन्द्रोदय हो, तो उस पानी से चन्द्रमा को अर्घ्य दें और हाथ जोड़कर चन्द्रदेव को नमस्कार करें. एक बार फिर से याद दिला दूं किसंकष्टी चतुर्थी के दिन चन्द्रोदय का समय रात 9 बजकर 18 मिनट पर है.

आर्थिक स्थिति: अगर आप अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहते हैं, तो संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश पूजा के समय 5 गोमती चक्र लेकर, उन्हें हल्दी से पीला करके भगवान के चरणों में रख दें और धूप-दीप आदि से भगवान की पूजा के बाद उन गोमती चक्र को एक पीले रंग के कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में या अपने धन वाले स्थान पर रख दें.

विशेष इच्छा की पूर्ति :अगर आपकी कोई विशेष इच्छा है, जिसे पूरा करने के लिए आप बहुत दिनों से जुटे हुए हैं तो अपनी वह विशेष इच्छा पूरी करने के लिए संकष्टी चतुर्थी के दिन श्री गणेश के सामने घी का एक और तेल का एक दीपक जलाएं. घी का दीपक देवताओं के लिए होता है, जबकि तेल का दीपक साधक की कामनाओं के लिए होता है, उसकी इच्छापूर्ति के लिए होता है। साथ ही ध्यान रहे कि घी के दीपक में सफेद खड़ी बत्ती लगाकर, उसे श्री गणेश के दाहिने हाथ की तरफ रखना चाहिए और तिल के तेल के दीपक में पड़ी हुई लाल बत्ती लगाकर भगवान के बायें हाथ की तरफ रखना चाहिए और दीपक जलाते समय आपकी जो भी इच्छा हो, उसे मन ही मन कहें.

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