कानपुर के नवाबगंज में दबिश से पहले अपराधी अनूप शुक्ला को फरार कराने वाले दरोगा आदित्य बाजपेई और कांस्टेबल विजयराज के खिलाफ थानेदार की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई है. अब दोनों को अरेस्ट करके जेल भेजने की तैयारी की जा रही है. मालूम हो कि सीसीटीवी से खाकी और अपराधी के गठजोड़ का मामला सामने आया था.

सीसीटीवी में इतना सब साफ-साफ कैद हो गया है कि दरोगा और कांस्टेबल के पास सफाई देने का कोई विकल्प नहीं बचा है. इसी के चलते तत्काल प्रभाव दरोगा और कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के बाद पुलिस कमिश्नर ने दोनों पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई है.

आरोपी दरोगा आदित्य बाजपेई.
दीनू के भाई की तलाश में अनूप के घर गई थी पुलिस: नवाबगंज थाना प्रभारी केशव कुमार तिवारी की तहरीर पर दरोगा आदित्य बाजपेई और कांस्टेबल विजयराज के खिलाफ बीएनएस की धारा-264 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है. थाना प्रभारी के मुताबिक अपहरण और हत्या के प्रयास के मामले में फरार चल रहे दीनू का भाई नवाबगंज निवासी संजय उपाध्याय, रेनू उपाध्याय और मनु उपाध्याय के अनूप शुक्ला के घर में छिपे होने की सूचना मिली थी. इसी के चलते अमरूद मंडी जागेश्वर मंदिर नवाबगंज स्थित अनूप के घर पर पुलिस ने दबिश दी थी. दरोगा आदित्य और कांस्टेबल विजय राज को बाइक से अनूप के घर पहुंचे और अनूप के साथ ही अन्य आरोपियों को वहां से भगा दिया. यह पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया.

अपराधी अनूप शुक्ला और दीनू उपाध्याय (नीली शर्ट).
दरोगा और कांस्टेबल आरोपी से बात करते कैमरे में हुए थे कैद: दरोगा और कांस्टेबल अनूप से बात करते और फिर हाथ हिलाकर इशारा करते हुए कैद हुए हैं. इसके साथ ही अनूप शुक्ला भी ट्राॅली बैग लेकर भागते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ है. आदित्य बाजपेई द्वारा गाडी धीमा कर उस व्यक्ति की ओर देखना व रुकना प्रतीत हो रहा है. इससे एक बात तो साफ है कि आदित्य ने दबिश से पहले अरोपियों को मौके से फरार करवा दिया। सीसीटीवी के आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है.
एसीपी कर्नलगंज आदित्य चौरसिया ने बताया कि थाना प्रभारी केशव कुमार तिवारी की तहरीर पर दरोगा आदित्य बाजपेई और कांस्टेबल विजय राज के खिलाफ अपराधी को फरार कराने की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई है. दबिश के दौरान थाने की जीडी में जो रवानगी लिखी थी इसी आधार पर एफआईआर लिखी गई है.

इस धारा में दर्ज हुई एफआईआर: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 264, “लोक सेवक की ओर से गिरफ्तारी में चूक या भागने देना” से संबंधित है. यह उन मामलों पर लागू होती है जहां किसी लोक सेवक को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने या हिरासत में रखने का कानूनी कर्तव्य है, लेकिन वह जानबूझकर या लापरवाही से ऐसा करने में विफल रहता है, या उस व्यक्ति को भागने देता है.
एफआईआर में फरार अधिवक्ता अनूप शुक्ला के कहीं भी फरार होने का जिक्र नहीं है: अब आपको जानकर हैरत होगी कि दरोगा का अपराधियों के साथ साठगांठ का वीडियो सामने आने के बाद भी पुलिस दरोगा आदित्य बाजपेई और कांस्टेबल को बचाने के लिए एफआईआर में खेल कर दिया. एफआईआर में लिखा है कि हत्या के प्रयास और अपहरण के केस में फरार चल रहे जेल में बंद दीनू के भाई संजय उपाध्याय समेत अन्य आरोपियों की तलाश में 12 जून को अनूप शुक्ला के घर पर दबिश दी थी. एफआईआर में फरार अधिवक्ता अनूप शुक्ला के कहीं भी फरार होने का जिक्र नहीं है. न ही उसकी तलाश में दबिश देने का जिक्र है. कानूनी जानकारों की मानें तो इसका सीधा लाभ एफआईआर में नामजद आरोपी दरोगा और सिपाही को मिलेगा.
















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