अपना दल में बगावत: अनुप्रिया से नाराज नेताओं ने बनाया ‘अपना मोर्चा, 9 MLA के टच में होने का दावा

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UP में एक और राजनीतिक दल की एंट्री हो गई है. अनुप्रिया पटेल और उनके पति आशीष पटेल से नाराज होकर अपना दल (एस) छोड़ने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को ‘अपना मोर्चा’ नाम से नया संगठन बनाने की घोषणा की. मंगलवार को यूपी प्रेस क्लब में ‘अपना मोर्चा’ के संयोजक चौधरी ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह पटेल ने कहा कि पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं का दम घुट रहा था.अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल और उनके पति प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल पर कार्यकर्ताओं को अपमानित करने का आरोप लगाया. ब्रजेंद्र प्रताप सिंह की गिनती कभी अनुप्रिया पटेल के खास लोगों में होती थी.

उन्होंने कहा कि दोनों पति-पत्नी कुर्मी बिरादरी का नहीं बल्कि अपना हित साधने में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि बीते 10 वर्षों में जो कार्यकर्ता नाराज होकर अपना दल (एस) से बाहर हुए हैं उन्होंने अब एकजुट होकर अपना मोर्चा बनाया है. यह मोर्चा भी फिलहाल एनडीए के साथ ही रहेगा लेकिन आगे इस पर पुनर्विचार भी होगा. वह कुर्मी वोटरों के बीच सवाल पूछो-सच जानो यात्रा निकालेंगे और समर्थन जुटाएंगे.

ब्रजेंद्र प्रताप ने दावा किया कि अपना दल के 9 मौजूदा विधायक हमारे और हम उनके सम्पर्क में हैं. हम दिल्ली की तरफ देख रहे हैं और जल्द ही हम किसी ठोस नतीजे पर पहुंच जाएंगे. मोर्चा इस बात पर भी मन्थन करेगा कि एनडीए से मिलने वाली विधान सभा और लोकसभा की सीटों पर हम दावा करें या नहीं? कहा कि अपना दल दल को अनु्प्रिया-आशीष पटेल के प्राइवेट लिमिटेड बना जाने से हजारों कार्यकर्ता और कुर्मी समाज के लोग निराश हैं. सत्ताधारी दल में भगदड़ मची है. मोर्चा इस बिखराव को रोकना और समाज के लोगों के सामने सच लाना अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझता है. हम बिरादरी के बीच जाकर 10 साल का सच लोगों को बताएंगे. अपील करेंगे कि समाज उनसे और हमसे सवाल करे. हम जवाब देंगे. फिर जो फैसला बिरादरी का होगा, वो सिर माथे पर रखेंगे.

उन्होंने मांग की कि अब भारतीय जनता पार्टी की लीडरशिप इस बात का सर्वे कराये कि किसान- कुर्मी- कमेरा मतदाता किसके साथ है? हम जानते हैं कि लोग बिखर गए हैं. इसीलिए हम बिखर गई टीम को एकजुट करने का अभियान चला रहे हैं. अनुप्रिया कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा खो चुकी हैं, बिरादरी में भी उनके प्रति कोई सहानुभूति नहीं बची है.

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