अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूकर लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का आज उनके शहर लखनऊ में जोरदार स्वागत किया गया. एयरपोर्ट पर खुद उत्तर प्रदेश डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक कैप्टन शुभांशु शुक्ला के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे. अपने स्कूल तक रोड शो करेंगे. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लखनऊ में राजधानी के बेटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का नागरिक अभिनंदन करेंगे. शुभांशु शुक्ला हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से सफल मिशन पूरा कर लौटे हैं. इस बड़ी सफलता के बाद सोमवार को पहली बार लखनऊ आए हैं. एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 से लेकर शहर के प्रमुख चौराहों तक, भाजपा कार्यकर्ता और लोग शुभांशु पर फूलों की बारिश कर रहे हैं.

एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने परिवार से साझा किए अनुभव, सिर में हल्का दर्द
स्पेस में शुरुआती तीन दिन ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और उनके अन्य सहयोगियों के लिए बड़ी चुनौती रहे. भारत लौटने के बाद अपने परिवार से फोन पर अलग-अलग समय हो रही बातचीत में उन्होंने ये अनुभव साझा किए. बताया कि जब अन्तरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पहुंचे तो एक वक्त उस वातारण में खुद को ढालने में लगा. इस बीच शुरुआत के तीन दिन रह रह कर सिर में हल्का दर्द महसूस होता था. संतुलन बनाने की कोशिश की.
उन्होंने अपने पिता शंभूदयाल और मां आशा को फोन पर बताया कि स्पेस में शरीर पहले दिन की तुलना में जल्दी बेहतर महसूस करने लगता है. माइक्रोग्रैविटी में शरीर में कई बदलाव होते हैं, जैसे तरल पदार्थ का स्थानांतरण , हृदय गति में परिवर्तन. साथ ही संतुलन बनाने के लिए अभ्यास करना होता है. बावजूद इसके वह इस बात से हैरान हुए कि हमारा शरीर कितनी तेजी से नए वातावरण में खुद को ढाल लेता है. जब 28 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात हो रही थी तब उनको स्पेस स्टेशन पहुंचे हुए बमुश्किल 72 घंटे हुए थे। ऐसे में कैमरे के सामने स्थिर रहने के लिए उनको अपने पैर बांधने पड़े तब बात कर पाए.
फोटोग्राफी का शौक अंतरिक्ष में भी रहा, बनाया टाइमलैप्स: शुभांशु शुक्ला को स्पेस फोटोग्राफी का शौक है. स्पेस में रहने के दौरान भी उन्होंने इस शौक को बनाए रखा. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक शॉर्ट वीडियो जारी किया. यह टाइमलैप्स है जो उन्होंने स्पेस क्राफ्ट की खिड़की से बनाया. अपने संदेश में कहा कि ‘वीडियो में आपको जो बैंगनी रंग की चमक दिख रही है, वह पूरे देश में चल रहे तूफानों में हो रही बिजली है. जब रोशनी कम हो जाती है और एक गहरा क्षेत्र दिखाई देता है, वह हिमालय है। जैसे ही हम इसे पार करते हैं, रोशनी आने लगती है, क्योंकि आप अंतरिक्ष में सूर्योदय देख रहे हैं. बैकग्राउंड में तारों को भी ध्यान से देखें.’
उन्होंने लिखा कि यह सचमुच प्राकृतिक तत्वों का एक मंत्रमुग्ध कर देने वाला नृत्य है, जो इसे एक खूबसूरत नजारा बना देता है. दुर्भाग्य से, मैं मानसून के मौसम में ऊपर था और आसमान में ज्यादातर बादल छाए हुए थे, फिर भी मैं भारत के कुछ शॉट्स लेने में कामयाब रहा, जिनमें से एक आप देख रहे हैं.















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