भारत में GST (गुड एंड सर्विस टैक्स) सिस्टम में एक बड़ा बदलाव संभव है. GST काउंसिल ने हाल ही में पान मसाला, गुटखा, सिगरेट और च्यूइंग टॉबैको पर टैक्स लगाने के तरीके में बदलाव की सिफारिश की है. पैनल का मानना है कि इन प्रोडक्ट्स पर टैक्स की गणना अब उनके रिटेल सेल प्राइस (RSP) यानी पैकेज पर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य के आधार पर की जाए. इसका उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और राज्य एवं केंद्र को होने वाली राजस्व हानि को कम करना है.
वर्तमान में, CGST एक्ट की धारा 15(1) के तहत, इन उत्पादों की कर योग्य आपूर्ति का मूल्य ट्रांजैक्शन वैल्यू यानी वास्तविक लेन-देन मूल्य के आधार पर तय किया जाता है. इसका मतलब है कि टैक्स उस कीमत पर लगाया जाता है, जो खरीदार और विक्रेता के बीच लेन-देन में तय हुई हो. लेकिन धारा 15(5) के तहत सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कुछ विशेष वस्तुओं के लिए अलग तरीके से मूल्य तय कर सके.
फिटमेंट कमेटी, जिसमें केंद्र और राज्यों के अधिकारी शामिल हैं, ने सुझाव दिया है कि पान मसाला, गुटखा, सिगरेट और च्यूइंग टॉबैको की वैल्यूएशन अब उनके पैकेज पर लिखे अधिकतम खुदरा मूल्य (RSP) के आधार पर की जाए. इसका सीधा असर यह होगा कि टैक्स चोरी की संभावनाएं कम होंगी, क्योंकि कई निर्माता वर्तमान में लेन-देन मूल्य कम दिखाकर कर देय राशि घटा देते हैं.
एक्सपर्ट का क्या कहना? विश्लेषकों का कहना है कि इस बदलाव से इन उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है. हालांकि कुछ कंपनियां एक्स्ट्रा टैक्स का कुछ हिस्सा अपने ऊपर ले सकती हैं, लेकिन आम तौर पर यह बढ़ा हुआ टैक्स उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा. इसका मतलब यह है कि पान मसाला, गुटखा और सिगरेट की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं.
जीएसटी प्रावधानों में बदलाव: GST (Compensation to States) Act, 2017 की प्रावधानों के तहत यह बदलाव संभव है, क्योंकि इस कानून में पहले से ही उत्पाद की मात्रा, मूल्य या RSP के आधार पर सीस लगाने की अनुमति दी गई है. अब यह कदम विशेष रूप से उन वस्तुओं पर लागू किया जाएगा, जो टैक्स चोरी के दृष्टिकोण से संवेदनशील मानी जाती हैं.















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