संभल की गौसुलवरा मस्जिद कमेटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देने वाली मस्जिद कमेटी की याचिका को हाईकोर्ट ने मेरिट के आधार पर खारिज कर दिया है. संभल के रावा बुजुर्ग स्थित गौसुलवरा मस्जिद कमेटी की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जेंट बेसिस पर याचिका दाखिल की गई थी. जिस पर हाई कोर्ट में छुट्टी के दिन स्पेशल बेंच बैठी.
नहीं मिली हाई कोर्ट से राहत: शुक्रवार को हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच ने मस्जिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया था, जिस पर मस्जिद कमेटी ने जमीन के दस्तावेज कोर्ट के सामने पेश किए. मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि मस्जिद का कुछ हिस्सा तालाब की जमीन पर है. जिसके बाद हाईकोर्ट ने मेरिट के आधार पर मस्जिद कमेटी के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया.
कब्जा मुक्त कराने का फैसला: हालांकि, हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी को ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ सम्भल की निचली अदालत में ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ अपील फाइल करने की छूट दी है. आपको बता दें कि संभल के रावा बुजुर्ग स्थित सरकारी तालाब की जमीन पर मैरिज हॉल और मस्जिद बनाए जाने का मामला सामने आया था. जिसके बाद जिला प्रशासन ने सरकारी तालाब को कब्जा मुक्त कराने का फैसला किया था.
मस्जिद के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती: संभल जिला प्रशासन ने तालाब पर बने मैरिज हॉल और मस्जिद को हटाने का आदेश पारित किया. जिसके बाद मैरिज हॉल पर बुलडोजर एक्शन हुआ, लेकिन मस्जिद कमेटी ने खुद से हटाने का अनुरोध 2 अक्टूबर को जिला प्रशासन से किया. जिसके बाद प्रशासन ने मस्जिद पर बुल्डोजर न चलाकर मस्जिद कमेटी को खुद से हटाने को कहा था. जिला प्रशासन से मिली राहत के बाद मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जेंट बेसिस पर याचिका दाखिल कर मस्जिद के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती दी.
HC में सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच: शुक्रवार को छुट्टी के दिन हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच बैठी. हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई, मस्जिद कमेटी से हाईकोर्ट ने जमीन के स्वामित्व वाले दस्तावेज मांगे. मस्जिद कमेटी ने दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए हाईकोर्ट से समय मांगा. कोर्ट ने शनिवार सुबह तक दस्तावेज पेश करने को कहा था जिसके बाद शनिवार सुबह 10 बजे से फिर मामले की सुनवाई शुरू हुई. जिस पर हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका को मेरिट के आधार पर खारिज करते हुए सम्भल की निचली अदालत में अपील दाखिल करने की छूट दी.
















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