रामनगरी अयोध्या का बहुप्रतीक्षित कार्तिक परिक्रमा व पूर्णिमा स्नान मेला मध्यरात्रि के बाद 14 कोसी परिक्रमा के साथ शुरू हो गया. पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 29/30 अक्तूबर को भोर में 4.51 बजे शुरू होकर 30/31 अक्तूबर को भोर में 4.41 मिनट तक रहेगी. ऐसी स्थिति में यह परिक्रमा गुरुवार को पूरे दिन चलेगी. 14 कोसी अर्थात करीब 50 किमी की परिधि में चलने वाली इस परिक्रमा में करीब 8 से 10 घंटे का समय लगता है. यही कारण है कि अधिकांश परिक्रमार्थी रात में मुहूर्त से पहले परिक्रमा की शुरुआत कर देते हैं और नवमी के मुहूर्त में उनकी परिक्रमा पूरी हो जाती है. वहीं वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है.
हनुमत संस्कृत महाविद्यालय के सेवानिवृत्त आचार्य हरफूल शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रों में अलग-अलग परिक्रमा का विधान है. मंदिरों में अंतरगृही परिक्रमा तो होती ही है। अयोध्या धाम की परम्परा में 14 कोसी परिक्रमा के अतिरिक्त प्रत्येक एकादशी को भी संत साधक रामनगरी की परिक्रमा करते हैं. कार्तिक शुक्ल एकादशी जिसे देवोत्थानी एकादशी कहा जाता है को लाखों की संख्या में इस पंचकोसी परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं. इसी तरह से 84 कोसी परिक्रमा भी बैसाख कृष्ण प्रतिपदा से शुरू होकर बैसाख शुक्ल नवमी यानी जानकी नवमी तक होती है. यह परिक्रमा मखौड़ा धाम से शुरू होकर अयोध्या के सीता कुंड में विराम लेती है. विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए परिक्रमार्थी करीब 23 दिनों में परिक्रमा पूरी करते हैं.
लाखों श्रद्धालुओं ने मां सरयू के पुण्य सलिल में लगाई डुबकी: परिक्रमा शुरू होने के पहले पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से विभिन्न माध्यमों ट्रेन, बस व निजी एवं प्राइवेट संसाधनों से यहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां सरयू के पुण्य सलिल में डुबकी लगाई. इसके उपरांत नागेश्वर नाथ मंदिर व हनुमानगढ़ी एवं कनक भवन सहित राम मंदिर में दर्शन पूजन किया। इसके उपरांत अपने -अपने गुरुधामो में जाकर गुरुदेव का आर्शीवाद लिया. पुनः अपने संकल्प की पूर्ति के लिए रात्रि में निकल पड़े. नंगे पांव उमड़े श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस परिक्रमा में सभी आयु वर्ग के श्रद्धालु बाल-वृद्ध व सभी नर-नारी शामिल थे. इसके पहले परिक्रमा में उमड़ी भारी भीड़ को ध्यान में रखकर यातायात प्रतिबंधो को लागू कर दिया गया है. वहीं परिक्रमा पथ पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए फोर्स को तैनात करने के साथ सीसीटीवी व ड्रोन कैमरे से निगरानी भी की जा रही है.
पुण्यार्जन के लिए विभिन्न संस्थाओं ने लगाए शिविर: करीब 24 घंटे चलने वाली रामनगरी की 14 कोसी परिक्रमा में परम्परागत रूप से अलग-अलग संस्थाओं व स्वयंसेवी संगठनों की ओर से पूरे परिक्रमा पथ पर अलग-अलग शिविर लगाया गया है. इनमें नि: शुल्क जलपान, पूड़ी-सब्जी व दवाओं के अतिरिक्त विश्राम के लिए भी शिविर लगाए गए हैं.
अयोध्या की सीमा सील: अयोध्या की सीमा को सील कर दिया। अयोध्या में प्रवेश के सभी मार्गों पर लगी बेरिकेडिंग गिरा दी गई व बाहरी दो व चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लग गई है. स्थानीय लोगों का पहचान पत्र देखकर उन्हें दो पहिया वाहनों के साथ प्रवेश दिया गया. वहीं, रात 10 बजे से हाईवे को भी सील कर मालवाहक वाहन जैसे ट्रक, डीसीएम व ट्रैक्टर आदि को अन्य मार्ग पर डायवर्ट कर दिया गया.
















Leave a Reply