जौनपुर में चाइनीज मांझे से कटकर डॉक्टर की मौत, गर्दन की हड्डी भी रेत गया, सड़क पर बिखरा खून ही खून

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UP के जौनपुर में बुधवार को प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की चपेट में आने से डॉक्टर की सड़क पर मौत हो गई. मांझे की तेज धार ने डॉक्टर के गले की हड्डी तक रेत दी थी. आसपास मौजूद लोगों ने एंबुलेंस के माध्यम से डॉक्टर को अस्पताल भेजा. लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में डॉक्टर ने दम तोड़ दिया. गौरतलब है कि चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के बावजूद पतंगबाजों तक धड़ल्ले से इसकी सप्लाई हो रही है. जिसके चलते चंद दिनों में जिले में ये दूसरी मौत हुई है.

आपको बता दें कि जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत प्रसाद इंटरनेशनल स्कूल के पास बाइक सवार डॉ. समीर हाशमी की चाइनीज मांझे के चपेट में आने से मौत हो गई. समीर केराकत बाजार में फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में प्रैक्टिस करते थे. समीर के पिता ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वो किसी से मिलने जिला अस्पताल जा रहे थे.

बाइक पर हेलमेट लगाए समीर जब प्रसाद इंटरनेशनल स्कूल के पास पहुंचे तभी अचानक चाइनीज मांझे कि चपेट में आ गए. तेज धार से उनकी गर्दन कट गई. सड़क पर गिरते ही उनके गर्दन से खून का फव्वारा निकल गया. डॉ समीर को अपना हेलमेट निकालने तक का मौका ना मिला.

आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह एंबुलेंस के माध्यम से डॉक्टर समीर को जिला अस्पताल भिजवाया. जिला अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना की जानकारी देते हुए सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने बताया कि चाइनीज मांझे की चपेट में आने से डॉ समीर की मौत हुई है जिसे संज्ञान में लेते हुए मांझे के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा और बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

चार भाइयों में सबसे छोटे समीर घर का सहारा थे. पिता मुकीम बाजा बजाने का काम करते हैं. समीर फिजियोथेरेपिस्ट होने के साथ-साथ कुछ समय जिला अस्पताल में ट्रेनिंग के दौरान भी अपनी सेवाएं दे चुके थे. इसके अलावा वे केराकत तहसील क्षेत्र में अपना क्लिनिक भी चलाते थे.

चाइनीज मांझे के खिलाफ अभियान चलाने वाले अधिवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि पुलिस प्रशासन की शह पर जगह-जगह पर चाइनीज मांझे की बिक्री हो रही है. कोरमपूर्ति के लिए दिखावटी कार्यवाही कर दी जा रही है लेकिन कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 12 जनवरी को एक लीगल नोटिस एनजीटी की गाइडलाइंस के तहत भेजी गई है. एनजीटी की गाइडलाइंस के अनुसार प्रतिबंध मांझे की बिक्री और उसकी निगरानी के लिए जवाबदेही तय की गई थी.

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