अनिल कुमार मीणा, अलीगढ़।
सामाजिक उत्थान खासतौर पर दलितों और पिछड़ो के हितों व कल्याण की लंबी-चौड़ी बातें हर सियासी दल, हर बड़ा नेता गला फाड़-फाड़कर, घड़ियाली आंसू बहा-बहाकर करते थकता नहीं लेकिन कूड़े के ढेर में पड़े एक लाचार भूखे इंसान को जो कूड़ा खा रहा था, उस पर किसी की नजर पूरे 24 घंटे तक नहीं गयी. राह चलते एक भले मानुष ने 112 पर फोन किया फिर एम्बुलेंस आयी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया.
इंसानसियत को शर्मसार करने वाली यह किसी फिल्म की पटकथा नहीं बल्कि अलीगढ़ जनपद की जीती-जागती हकीकत है. दीपक नाम के इस अभागे की दास्तान यह है कि इसके मालिक ने इससे अपने घर में 10 साल काम कराया, चोटिल और बीमार होने पर कूड़े के ढेर में फेक गया. बिहार का रहने वाला यह घायल अधेड़ दीपक, गौतमबुद्धनगर जेवर के गाँव छतांग में करता मजदूरी करता था.
अलीगढ़ जनपद के टप्पल थाना इलाके के गाँव सारौल यमुना एक्सप्रेस – वे के निकट मिले इस घायल अधेड़.दीपक का अब CHC टप्पल में पैर के जख्म का इलाज चल रहा है और उसे खाना भी मिल रहा है. यह मसला एक दीपक का ही नहीं बल्कि हजारों-लाखों का है जो ऐसे दरिदों का शिकार बनते है और हमारी सरकारें कुछ नहीं कर पाती.
















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