UP के आगरा में प्रेम की अमर मिसाल ताजमहल देखने आए फ्रांस के एक विदेशी जोड़े की जिंदगी ने आगरा में नया मोड़ ले लिया.ताजमहल के दीदार के बाद इस विदेशी कपल ने न सिर्फ भारतीय संस्कृति को करीब से समझा, बल्कि हिंदू रीति-रिवाजों से प्रभावित होकर मंदिर में विवाह भी रचा लिया. 74 वर्षीय फिलिप और 68 वर्षीय सिल्विया ने करीब 40 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद .
क्या हैं पूरा मामला ? बताया जा रहा है कि आगरा के प्रसिद्ध राधा-कृष्ण मंदिर में इस अनोखे विवाह का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, पंडितों द्वारा विधिवत पूजा और अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस दृश्य के साक्षी बने, जहां विदेशी जोड़ा पूरे श्रद्धा भाव से हिंदू विवाह संस्कारों का पालन करता नजर आया।
40 साल का साथ, अब बंधन में बदला रिश्ता: खबरों के मुताबिक, फिलिप और सिल्विया ने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से एक-दूसरे के साथ रह रहे थे, लेकिन उन्होंने कभी विवाह नहीं किया था.भारत भ्रमण के दौरान जब उन्होंने यहां की संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को समझा, तो उन्हें लगा कि हिंदू विवाह सबसे पवित्र और आत्मिक बंधन है. इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने मंदिर में शादी करने का फैसला लिया.
25 दिन के भारत भ्रमण ने बदली सोच: फ्रांस से आए इस कपल ने करीब 25 दिनों तक भारत के विभिन्न शहरों का घुमा. इस दौरान उन्होंने भारतीय जीवनशैली, धार्मिक परंपराएं और पारिवारिक संबंध को करीब से देखा. फिलिप ने कहा कि भारत में रिश्तों को जिस सम्मान और पवित्रता के साथ देखा जाता है, उसने उनके दिल को छू लिया. वहीं सिल्विया ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने उन्हें शांति का अनुभव कराया.
भारतीय विवाह सबसे पवित्र: विवाह के बाद दोनों ने कहा कि हिंदू विवाह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्माओं का मिलन है.अग्नि के समक्ष ली गई कसमें और सात फेरे उनके लिए बेहद भावुक और यादगार क्षण रहे. उन्होंने बताया कि ताजमहल की नगरी में उनकी नई प्रेम कहानी की शुरुआत हुई है, जो जीवनभर उनके दिल में बसेगी.
पर्यटन के साथ संस्कृति का संदेश: इस अनोखी शादी ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं न सिर्फ देशवासियों को, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी गहराई से प्रभावित करती हैं. ताजमहल देखने आए इस विदेशी जोड़े की कहानी अब आगरा में चर्चा का विषय बनी हुई है और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान को और मजबूत कर रही है.
















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