राहुल मिश्रा,प्रयागराज।
प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है. 48 घंटे के अंदर प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा है. इसमें मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और जबरन भीड़ में पालकी घुसाने को लेकर सवाल किए हैं. पूछा गया है कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन का दिया जाए.
अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी राज ने कहा, ‘सरकार अब बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है. पंडाल के पीछे गुपचुप तरीके से नोटिस चस्पा कर दिया. बुधवार देर रात प्रशासन का एक कर्मचारी शिविर में आया. उसने कहा कि आपने इस नोटिस का जवाब नहीं दिया. तब जाकर हमें इसकी जानकारी हुई.’
उन्होंने कहा, ‘हमने नोटिस देखा तो उस पर 18 जनवरी की डेट पड़ी थी. यानी, उसे बैक डेट पर जारी करके चस्पा किया गया था. फिलहाल, नोटिस का जवाब तैयार है. जल्द प्रशासन को दिया जाएगा.’

दूसरे नोटिस में अविमुक्तेश्वरानंद से 2 सवाल किये
पहला सवाल- मौनी अमावस्या के दिन आपने इमरजेंसी के लिए रिजर्व पांटून पुल पर लगा बैरियर तोड़ा. बिना अनुमति के बग्घी के साथ संगम जाने की कोशिश की. इससे भगदड़ का खतरा पैदा हो गया. आपके चलते सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ. श्रद्धालुओं को वापस भेजने में दिक्कत हुई. आपके कृत्य से व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई.
दूसरा सवाल- आपने खुद को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड लगाए हैं जबकि आधिकारिक रूप से आपके शंकराचार्य होने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है. अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं.
इससे पहले, सोमवार रात 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार मेला प्रशासन का नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे थे. हालांकि, शिष्यों ने रात को नोटिस लेने से मना कर दिया था. इसके बाद मंगलवार सुबह 8 बजे कानूनगो अनिल कुमार दोबारा पहुंचे और शिविर के गेट पर पहला नोटिस चस्पा किया था.
इसमें सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के एक आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया. 12 घंटे बाद, यानी मंगलवार रात 10 बजे अविमुक्तेश्वरानंद ने 8 पन्नों का जवाब मेला प्रशासन को भिजवाया. अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अगर नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो वह मानहानि का केस करेंगे.
मालूम हो कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा. विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई. इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे.
















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