नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने हाथ का भी छोड़ा साथ, कभी मायावती के थे करीबी; अब चंद्रशेखर से मिलाएंगे हाथ?

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UP में आगामी विधानसभा से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस से नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इस्तीफा दे दिया है. नसीमुद्दीन पहले बहुजन समाजवादी (बीएसपी) पार्टी में थे. लेकिन, उन्होंने बीएसपी छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन किया था. अब उन्होंने कांग्रेस से भी अलविदा कह दिया है. उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का बेहद करीबी माना जाता है. विधानसभा चुनाव तो अगले साल होनी है. लेकिन, आने वाले महीनों में प्रदेश में पंचायत के चुनाव भी होने हैं. 

नसीमुद्दीन के इस फैसले से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जब बसपा का साथ छोड़ा था, तब कांग्रेस ने उन्हें पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश किया गया था. उम्मीद जताई गई थी कि सिद्दीकी के आने से कांग्रेस को मुस्लिम वोट बैंक में मजबूती मिलेगी और संगठन को भी मदद मिलेगी. लेकिन कुछ ही समय में यह उम्मीद कमजोर पड़ती दिखाई दी. 

सिद्दीकी का कहना है कि उन्होंने पर्सनल कारणों की वजह से पार्टी छोड़ने का फैसला किया है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा हो रही है कि वह सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण की पार्टी आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम) को ज्वाइन कर सकते हैं. हालांकि, अभी उन्होंने इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है.

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस को कहा अलविदाकांग्रेस के लिए यह इस्तीफा खास अहमियत रखता है, क्योंकि पार्टी पहले से ही उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है. एक अनुभवी नेता के जाने से उनकी चुनावी संभावनाएं और कमजोर हो सकती हैं. विपक्षी दल इस घटना को कांग्रेस की आंतरिक कमजोरियों से जोड़ कर देख रहे हैं.

पार्टी छोड़ने को लेकर क्या बोले नसीमुद्दीन सिद्दीकी?

कांग्रेस छोड़ने पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, “मुझे किसी के प्रति कोई नाराजगी नहीं है. मैं खड़गे, राहुल, प्रियंका, सोनिया जी का सम्मान करता हूं और करता रहूंगा. मेरे लिए वहां कोई काम नहीं था. मैं एक जमीनी स्तर का कार्यकर्ता हूं. आठ सालों तक मैं जमीनी स्तर पर काम नहीं कर सका. मैं कभी हाई-प्रोफाइल नेता नहीं रहा, न अब हूं, इसलिए मैं जमीनी स्तर पर काम करना चाहता हूं, इसी कारण मैंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी. मीडिया विभाग का अध्यक्ष बनाना जमीनी स्तर का काम नहीं है. किसी को समिति का सदस्य बनाना जमीनी स्तर का काम नहीं है… मैंने नेताओं से कहा था कि मैं संगठन का आदमी हूं. अब बहुत सी बातें ऐसी हैं जो कही नहीं जा सकतीं.”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिद्दीकी का अगला फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें किस पार्टी में बेहतर राजनीतिक भविष्य और प्रभावशाली भूमिका मिलती है. फिलहाल, उनका इस्तीफा उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई नए सवाल और चर्चाओं को जन्म दे रहा है.

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