प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स का उद्घाटन करके अपने नए कार्यालय से कामकाज की शुरुआत कर दी. इस कदम से देश के पॉवर सेंटर में बदलाव आएगा. पीएम मोदी ने सेवा तीर्थ से देश के 140 करोड़ देशवासियों को संबोधित करते हुए अपने इस फैसले के बारे में विस्तार से बताया है. पीएम मोदी ने कहा, ’13 फरवरी का दिन भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बना है. हमारे शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है, इस दिन जिस संकल्प के साथ हम बढ़ते हैं उसमें विजय जरूर प्राप्त होती है. आज हम सभी भी सेवा तीर्थ में विकसित भारत के लक्ष्य के साथ प्रवेश कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय, नीतियां बनी लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी. इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था.
बदल गया PMO का पता: सेवा तीर्थ से लिए गए अपने पहले फैसलों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज के हर वर्ग जैसे किसानों, महिलाओं, युवाओं और जरूरतमंद लोगों के लिए महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़ी फाइलें साइन की हैं. इन फैसलों में उनकी सेवा भावना की झलक स्पष्ट दिखाई पड़ती है. पीएम मोदी द्वारा लिए गए चार बड़े फैसलों के बारे में आपको बताते हैं.
संकल्प- सेवा तीर्थ से सिद्धि: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्घाटन किया. सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं. कर्तव्य भवन 1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कॉर्पोरेट मामले, शिक्षा, संस्कृति, कानून एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक और जनजातीय मामलों सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालय स्थित हैं. पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने साल 2014 से आम लोगों की खासकर गरीब और वंचित वर्ग से आने वाले तबके को राहत देने का काम किया है. पीएम मोदी ने ये भी कहा कि उनकी सरकार का प्रमुख लक्ष्य भारत को उसके पुराने औपनिवेशिक अतीत के प्रतीकों से हटाकर आधुनिक, भारतीय नागरिकों की जनभावना के अनुसार शासन व्यवस्था को बढ़ावा देना रहा है.
गणेश पूजा से शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रशासनिक परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का अनावरण करने के बाद कहा कि आज हम एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं. 13 फरवरी का यह दिन भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है. हम विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं. अपने लक्ष्य में विजय होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है. पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक अहम निर्णय हुए, नीतियां बनीं. लेकिन ये भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थीं. इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था.
‘पुराने प्रतीक आज से इतिहास बन गए’: पीएम मोदी पीएम मोदी ने ये भी कहा कि एक समय था, जब कलकत्ता शहर देश की राजधानी हुआ करता था. लेकिन 1905 के बंगाल विभाजन के उस दौर में कलकत्ता ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का प्रबल केंद्र बन चुका था. इसलिए अंग्रेजों ने 1911 में भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट किया, और उसी के बाद अंग्रेजी हुकूमत की जरूरतों और उसकी सोच को ध्यान में रखकर नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी इमारतें बनाने का काम शुरु हुआ. रायसीना हिल्स के इन भवनों के उद्घाटन के वक्त उस समय के वायसराय ने कहा था कि ये भवन ब्रिटिश सम्राट की इच्छाओं के अनुरूप बने हैं. यानी ये भवन ब्रिटेन के महाराजा की सोच को गुलाम भारत की जमीन पर उतारने का माध्यम थे. रायसीना हिल्स का चुनाव भी इसलिए किया गया ताकि ये इमारतें दूसरी इमारतों से ऊपर रहें, कोई उनकी बराबरी न कर सके.
21 वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हुआ आगे क्या होगा? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा तीर्थ का ये परिसर किसी पहाड़ी पर न होकर जमीन से ज्यादा जुड़ा है. मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं. यहां से जो फैसले होंगे, वो किसी महाराजा की सोच को नहीं, 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि इस समय 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है. ये जरूरी है कि विकसित भारत की हमारी कल्पना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, हमारे कार्यस्थलों और हमारी इमारतों में भी दिखाई दे. जहां से देश का संचालन होता है, वो जगह प्रभावी और प्रेरणादायी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि करीब 100 साल पुरानी ये इमारतें अंदर से जर्जर होती जा रही थीं, नए तकनीकों और टूल्स के उपयोग के लिए नाकाफी साबित हो रही थीं, इनमें जगह और सुविधाओं की अपनी सीमाएं थीं. इसके अलावा भी कई चुनौतियां थीं.

13 फरवरी को हुआ बदलाव पीढ़ियों को प्रेरणा देगा: पीएम मोदी ने आगे कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत सरकार के अनेकों मंत्रालय दिल्ली के 50 से ज्यादा अलग-अलग स्थानों से चल रहे हैं. हर साल इन मंत्रालयों की इमारतों के किराए पर ही प्रतिवर्ष डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं. हर रोज 8-10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में आने-जाने का लॉजिस्टिक खर्च अलग होता था. अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के निर्माण से ये खर्च कम होगा, समय बचेगा और कर्मचारियों के समय की इस बचत से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी. पुराने भवनों से कई महत्वपूर्ण फैसले हुए, देश को नई दिशा मिली, सुधार की पहलें हुईं. वो परिसर, वो इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है. इसलिए हमने उन भवनों को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है. वो युगेयुगीन भारत म्यूजियम का हिस्सा होंगी. वो देश की आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा केंद्र बनेंगी. विकसित भारत की इस यात्रा में ये जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े. दुर्भाग्य की बात है कि आजादी के बाद भी हमारे यहां गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा. प्रधानमंत्री आवास को रेसकोर्स कहा जाता था, उपराष्ट्रपति के लिए कोई निवास स्थान था ही नहीं. राष्ट्रपति भवन तक आने वाले रास्ते को लोकतंत्र में राजपथ कहा जाता था. आजाद भारत में जो सैनिक, सुरक्षा बल, पुलिसकर्मी शहीद हुए, उनके लिए कोई स्मारक ही नहीं था. यानी दिल्ली की राजधानी पूरी तरह गुलामी की मानसिकता में जकड़ी हुई थी.
पीएम मोदी के पहले चार फैसले: पहला फैसला- पीएम राहत योजना, दूसरा- ‘लखपति दीदी’ का लक्ष्य अब 6 करोड़, तीसरा- गरीब किसानों का फंड बढ़ा, चौथा फैसला-स्टार्टअप के लिए नया फंड- फंड ऑफ फंड्स 2.0- पीएम राहत योजना’ शुरू होने को मंजूरी दी गई है. इस योजना के तहत किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. यानी इलाज के लिए पैसे की कमी से किसी की जान न जाए. यही इसका मकसद है. पीएम मोदी ने कृषि से जुड़ी पूरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. इससे भंडारण, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन जैसी सुविधाओं में सुधार होगा. देश के स्टार्टअप और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए Startup India के तहत फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी गई है. इस फंड का आकार 10,000 करोड़ रुपये होगा. इसका फायदा खास तौर पर डीप टेक, नई तकनीक, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और शुरुआती स्टार्टअप्स को मिलेगा.















Leave a Reply