ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, टैरिफ को बताया गैरकानूनी; लौटाना होगा वसूला पैसा

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दुनिया भर के देशों पर मनमाना टैरिफ थोपने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. यूएस सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है और उन्होंने गैरकानूनी तरीके से टैरिफ थोपा था. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपातकाल के लिए रखे गए नियमों का इस्तेमाल किया और टैरिफ लगाकर अधिकार का उल्लंघन किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत पर भी टैरिफ थोपा था. ट्रंप ने भारत पर पहले 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, लेकिन अब उसको कम कर के 18 प्रतिशत कर दिया है. 

अदालत ने कहा कि कानून “प्रेसिडेंट को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता.” चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के 6-3 के फैसले में कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि ट्रंप ने बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैक्स लगाने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया.

1977 में बना यह कानून, प्रेसिडेंट को नेशनल इमरजेंसी के दौरान कॉमर्स को रेगुलेट करने की इजाज़त देता है, लेकिन इसमें टैरिफ का साफ तौर पर ज़िक्र नहीं है. 

राष्ट्रपति ने कांग्रेस से मंजूरी नहीं ली: रॉयटर्स के मुताबिक चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले में लिखा कि “राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अपनी खास ताकत के दावे को सही ठहराने के लिए ‘कांग्रेस से मिली साफ मंज़ूरी दिखानी होगी.’ अदालत ने आगे कहा- “वह ऐसा नहीं कर सकते.”

6 बनाम 3 के बहुमत से आया फैसला: 6 बनाम 3 के बहुमत से आया सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला इमरजेंसी पावर्स लॉ के तहत लगाए गए टैरिफ से जुड़ा है,जिसे आधार बनाकर ट्रंप लगभग हर दूसरे देश पर बड़े “रेसिप्रोकल” टैरिफ़ लगाए.  यह ट्रंप के बड़े एजेंडा का पहला बड़ा हिस्सा है जो सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने आया था.

ज़्यादातर जजों ने फैसले में कहा कि संविधान “बहुत साफ़ तौर पर” कांग्रेस को टैक्स लगाने की पावर देता है, जिसमें टैरिफ भी शामिल हैं. चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा, “संविधान बनाने वालों ने टैक्स लगाने की पावर का कोई भी हिस्सा एग्ज़ीक्यूटिव ब्रांच को नहीं दिया था.”

तीन जज ट्रंप के समर्थन में दिखे: जस्टिस सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इससे असहमति जताई.  कैवनॉ ने असहमति में लिखा, “यहां जिन टैरिफ पर बात हो रही है, वे समझदारी वाली पॉलिसी हो भी सकती है और नहीं भी. लेकिन टेक्स्ट, इतिहास और मिसाल के तौर पर वे साफ़ तौर पर कानूनी हैं.”

टैरिफ का फ़सला ट्रंप को दूसरे कानूनों के तहत ड्यूटीज़ लगाने से नहीं रोकता है. हालांकि उनमें ट्रंप के कामों की स्पीड और गंभीरता पर ज़्यादा लिमिटेशन हैं, लेकिन टॉप एडमिनिस्ट्रेशन अधिकारियों ने कहा है कि वे दूसरी अथॉरिटीज़ के तहत टैरिफ फ्रेमवर्क को बनाए रखने की उम्मीद करते हैं. 

ट्रंप के आक्रामक विदेश और व्यापार नीति को करारा झटका: इस फैसले ने ट्रंप के दूसरे टर्म के इकोनॉमिक एजेंडा के एक अहम हिस्से को कमजोर कर दिया है. US सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का दुनिया भर में असर पड़ सकता है. ट्रंप ने अपनी दूसरी पारी में आक्रामक विदेश और व्यापार नीति को फॉलो किया और टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. ट्रंप के इस पॉलिसी की वजह से ग्लोबल ट्रेड वॉर की दिशा बदल गई. इसी कानून का इस्तेमाल कर ट्रंप ने भारत, चीन, मेक्सिको समेत दुनिया के कई देशों पर हैवी टैरिफ लगाए. इस टैरिफ के जरिए ट्रंप ने दुनिया के देशों से अरबों डॉलर रुपये वसूले. 

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