आज रवि प्रदोष तिथि का व्रत किया जा रहा है और इस व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इसे शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इस व्रत को रखने से सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख, शांति, समृद्धि की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं रवि प्रदोष व्रत का महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र और आरती…
प्रदोष व्रत हिन्दुओं के लिए एक महत्वपूर्ण व्रत हैं. यह व्रत प्रत्येक मास दो बार पड़ता है. इस व्रत को करने से भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है. प्रदोष व्रत एक पवित्र उपवास का दिन माना जाता हैं. प्रदोष व्रत, हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक चंद्र पखवाड़े में ‘त्रयोदशी’ को पड़ता है. यदि प्रदोष व्रत रविवार को पड़ता है तो इस व्रत को ‘रवि प्रदोष व्रत’ कहा जाता है. रवि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और भगवान सूर्य की कृपा बनी रहती हैं. रवि प्रदोष व्रत के दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए.
रवि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
सुबह के लिए पूजन मुहूर्त – 7 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 2 मिनट तक
प्रदोष काल पूजन मुहूर्त – 5 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 56 मिनट तक
रवि प्रदोष व्रत क्या होता है
यदि प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ता है तो उसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है.
रवि प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों में पुराणों में रवि प्रदोष व्रत का महत्व बताया गया है. सूर्य प्रदोष का व्रत करने से खोये हुए मान सम्मान की प्राप्ति होती है और भविष्य में उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद भी भगवान शिव और सूर्यनारायण देते हैं. इसमें कुछ विशेष मन्त्रों के जाप से हृदयरोग में भी आराम मिलता है.
शिवजी के मंत्र
पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय
जप संख्या: 108 बार (रुद्राक्ष माला से)
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
जप संख्या: कम से कम 11, 21 या 108 बार (रुद्राक्ष माला से)
शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
जप संख्या: 108 बार (रुद्राक्ष माला से)
रवि प्रदोष की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था. उस ब्रह्मण की पत्नी प्रदोष व्रत विधिपूर्वक करती थी. एक दिन उस बेटा गांव से कहीं बाहर जा रहा था, तभी रास्ते में कुछ चोरों ने उसे घेर लिया। चोरों ने उसकी पोटली छीन ली और उससे अपने घर के गुप्त धन के बारे में बताने को कहा. बालक ने कहा कि पोटली में रोटी के अलावा कुछ नहीं है और उसका परिवार बहुत ही गरीब है, उसके घर में कोई गुप्त धन नहीं है.
चोरों ने उसे छोड़ दिया और आगे बढ़ गए। वह बालक नगर में एक बरगद के पेड़ के नीचे छाए में सो गया. तभी राजा के सिपाही चोरों को खोजते हुए वहां आए और उस बालक को ही चोर समझ कर ले जाकर जेल में बंद कर दिया.
सूर्यास्त के बाद भी जब बालक घर नहीं पहुंचा तो उसकी मां परेशान हो गई. उस दिन वह प्रदोष व्रत का पालन कर रही थी. बालक की मां ने शिव पूजा के समय भोलेनाथ से प्रार्थना की कि उसका पुत्र कुशल हो, उसकी रक्षा करें. भगवान शिव ने उस मां की पुकार सुन ली. फिर शिव जी ने राजा को स्वप्न में बालक को जेल से मुक्त करने का आदेश दिया. साथ ही कहा कि वह बालक निर्दोष है, उसे बंदी बनाकर रखोगे, तो तुम्हारा सर्वनाश हो जाएगा.
अगले दिन सुबह राजा ने उस बालक को रिहा करने का आदेश दिया. बालक राजदरबार में आया और उसने पूरी घटना राजा को बताई. इस पर राजा ने उसे माता पिता को दरबार में बुलाया. ब्रह्माण परिवार दरबार में बुलाए जाने के आदेश डरा हुआ था. जैसे-तैसे वे राजा के दरबार में गए. राजा ने कहा कि आपका पुत्र निर्दोष है, उसे मुक्त कर दिया गया है. राजा ने ब्राह्मण परिवार की जीविका के लिए पांच गांव दान कर दिए.
भगवान शिव की कृपा से वह ब्राह्मण परिवार सुखीपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा. इस प्रकार से प्रदोष व्रत की महिमा का बखान किया गया है.
















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