प्रदोष व्रत आज: अधिक मास के शुक्रवार को पड़ना बेहद लाभकारी, जानें पूजा के शुभ मुहूर्त

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अधिकमास में पड़ने वाले इस शुक्र प्रदोष की सबसे विशेष बात ये है कि यह लक्ष्मी जी के दिन यानी शुक्रवार को पड़ रहा है. ऐसे में इस दिन धन प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर अभिषेक करें तो विशेष लाभ हो सकता है. आइए जानें प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और दुर्लभ योग क्या हैं.

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का बेहद खास दिन माना जाता है. जब यह व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति की मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं और जीवन के कई कष्ट दूर होने लगते हैं. प्रदोष व्रत हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय शाम का होता है, यानी सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक.

मुहूर्त और शुभ योग

प्रदोष काल मुहूर्त – शाम 7.36 से लेकर रात 9.20 तक है.
सर्वार्थ सिद्धि योग – सुबह 5.23 से लेकर सुबह 6.28
सुकर्मा योग – रात 09.26 के बाद बनेगा.

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व: इस व्रत को करने से व्यक्ति को रोग, तनाव, झगड़े और दुखों से राहत मिलती है. खासतौर पर दांपत्य जीवन की समस्याएं, आंखों से जुड़ी परेशानी और कुछ अन्य शारीरिक कष्ट भी कम हो सकते हैं. कई लोग इसे स्वास्थ्य और सुख-शांति के लिए विशेष फलदायी मानते हैं.

पूजा विधि:  सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे हल्के रंग के कपड़े पहनें, जैसे सफेद या गुलाबी. इसके बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और अपनी परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करें. दिनभर जितना हो सके ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का मन ही मन जाप करें और व्रत रखें. पानी का सेवन करते रहें. शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से अभिषेक करें. इसके बाद साफ जल से स्नान कराकर रोली, चावल, धूप और दीप से पूजा करें. भोग में खीर और फल अर्पित करें. इसके बाद बैठकर 108 बार ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव पंचाक्षरी स्तोत्र का 5 बार पाठ करें. अंत में भगवान शिव से अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना करें.

जरूरी नियम और सावधानियां

– पूजा से पहले घर और मंदिर की अच्छी तरह सफाई करें,

– काले या बहुत गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचें;

– मन में किसी भी तरह के गलत विचार न आने दें;

– बड़ों, गुरु और पिता का सम्मान करें;

– घर आई महिलाओं को मिठाई और पानी जरूर दें;

– पूरे दिन खुद को भगवान शिव के प्रति समर्पित रखें.

धन लाभ के लिए राशि अनुसार करें अभिषेक

मेष राशि- शुद्ध जल में लाल चंदन मिलाएं और इसी जल से शिवलिंग का अभिषेक करें. धन लाभ होगा.
वृषभ राशि- कच्चे दूध में चीनी व गुलाब की पंखुड़ियां डालें और शिवलिंग पर अभिषेक करें. आर्थिक रूप से स्थिरता मिलेगी.
मिथुन राशि- गंगाजल में दूर्वा डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें या गन्ने का रस भी चढ़ा सकते हैं. व्यापार में लाभ होगा.
कर्क राशि- कच्चे दूध या शुद्ध जल में अक्षत मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें. घर में धन और समृद्धि बढ़ेंगी.
सिंह राशि- शुद्ध जल में शहद और लाल फूल मिलाएं और उसी जल से शिवलिंग का अभिषेक करें. आर्थिक संपन्नता बढ़ेगी.
कन्या राशि- पहले बेलपत्र चढ़ाएं और फिर गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें. रुके हुए धन की प्राप्ति होगी.
तुला राशि- इत्र और जल से शिवलिंग का अभिषेक करें. आय के कई रास्ते खुलेंगे और आर्थिक तंगी दूर होगी.
वृश्चिक राशि- शुद्ध जल में काले तिल डाले और शिवलिंग का अभिषेक करें. अचानक धन मिल सकता है.
धनु राशि- हल्दी को शुद्ध जल में डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें या दूध चढ़ाएं. धन की प्राप्ति होगी.
मकर राशि- शिवलिंग पर पंचामृत या जल में सरसों का तेल डालकर अभिषेक करें. धन संचय करने में सफल होंगे.
कुंभ राशि- जल में शहद और गंगाजल मिलाएं और शिवलिंग पर अभिषेक करें. अटके धन को पा सकेंगे.
मीन राशि- दूध में केसर डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें. पैसों की बचत कर पाएंगे.

दांपत्य सुख और स्वास्थ्य के उपाय: अगर पति-पत्नी के बीच मनमुटाव है, तो शुक्र प्रदोष के दिन 11 लाल गुलाब के फूल गुलाबी धागे में पिरोकर दोनों मिलकर शिवजी को अर्पित करें और “ऊं नमः शिवाय” 27 बार बोलें. इससे रिश्तों में मधुरता बढ़ती है. वहीं, जिन लोगों को आंखों या चेहरे से जुड़ी समस्या है, वे सफेद चंदन में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर लगाएं. इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. इस तरह श्रद्धा और नियम से किया गया शुक्र प्रदोष व्रत जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है.

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