Holi 2026: आज पूरे देश में होली का पर्व मनाया जा रहा है. होली हर वर्ष चैत्र महीने में इसलिए मनाई जाती है क्योंकि यह मौसम परिवर्तन का समय होता है. मकर संक्रांति के बाद का समय अक्सर उदासी, थकान और मानसिक तनाव लेकर आता है. ऐसे में रंगों, संगीत, नृत्य और मेल-मिलाप के माध्यम से मन की नकारात्मकता दूर होती है.
होली पर लगाए जाने वाले रंग और खुशबू मन और शरीर दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं. अलग-अलग रंग मनोदशा को बदलते हैं और तनाव कम करते हैं. लोगों से गले मिलना, बातचीत करना और साथ मिलकर उत्सव मनाना मानसिक कड़वाहट और दूरी को खत्म करता है.
रंग खेलने का सही समय: द्रिक पंचांग के अनुसार, आज सुबह से ही रंग खेलना शुभ माना जा रहा है. परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, होली खेलने का सही समय सुबह का होता है. ऐसा माना जाता है कि दिन की शुरुआत में वातावरण ज्यादा शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है, इसलिए इस समय रंग खेलना शुभ माना जाता है. आमतौर पर लोग सुबह 8 बजे से रंग खेलना शुरू करते हैं और दोपहर 12 या 1 बजे तक इसे समाप्त कर देना बेहतर होता है. दोपहर के बाद ज्यादा देर तक रंग खेलना या शोर-शराबा करना उचित नहीं माना जाता है. इसलिए कोशिश करें कि होली का आनंद सुबह के समय ही लें और समय रहते उत्सव को शांतिपूर्वक समाप्त कर दें, ताकि दिनभर की ऊर्जा और खुशी बनी रहे.
होली खेलने के लिए राशि अनुसार चुने रंग: यदि होली के दिन व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार शुभ रंग से होली खेले तो कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देते हैं. जिससे उसके जीवन में धन-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मकता बढ़ती है.
मेष– हल्का लाल या गुलाबी
वृषभ– सफेद या क्रीम, हरा, गुलाबी रंग
मिथुन– हरा और गुलाबी रंग
कर्क– सफेद या चांदी जैसा रंग
सिंह– हल्का नारंगी या गोल्डन रंग
कन्या– हरा या मिट्टी जैसा रंग
तुला– पेस्टल पिंक या हल्का नीला, हल्का हरा,
वृश्चिक– मैरून या गहरा लाल रंग
धनु– पीला या हल्का केसरिया रंग
मकर– गहरा नीला या काला रंग
कुंभ– नीला या बैंगनी रंग
मीन– पीला या हल्का हरा रंग
क्या है होली का महत्व? ज्योतिष के अनुसार, होली के रंगों का संबंध ग्रहों से भी माना जाता है. अलग-अलग रंगों का प्रयोग करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है. इसलिए होली को जितना अधिक रंगों के साथ और खुशी से मनाया जाए, उतना ही बेहतर माना जाता है. इसलिए, होली का पर्व जरूर मनाएं. यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो हल्के या प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, लेकिन उत्सव से दूर न रहें. खुशियों के साथ मनाई गई होली न केवल आपके मन को प्रसन्न करती है, बल्कि आने वाले कई महीनों तक मानसिक शांति, ऊर्जा और सकारात्मकता भी प्रदान करती है.
होली की पौराणिक मान्यता: होली के दिन ही कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था. पहले उन्हें भगवान शिव ने भस्म कर दिया था, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन उनका पुनर्जन्म हुआ. वहीं, कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने पूतना राक्षसी का वध किया था. इसी कारण यह पर्व भगवान शिव और भगवान कृष्ण दोनों से जुड़ा हुआ माना जाता है. ब्रज क्षेत्र में भगवान कृष्ण के साथ रंगों और फूलों की होली खेली जाती है, जबकि वाराणसी में भगवान शिव के साथ विशेष भस्म होली का आयोजन होता है. काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन विशेष पूजा और अभिषेक किया जाता है.
















Leave a Reply