मथुरा में गौरक्षक चंद्रशेखर बाबा की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई. वह फरसा वाले बाबा के नाम से मशहूर थे। बाबा के एक साथी ने दावा किया- शनिवार तड़के बाबा 2 साथियों के साथ ट्रक का पीछा कर रहे थे. ट्रक में गौवंश था। ट्रक को ओवरटेक कर बाबा ने सामने बाइक खड़ी कर दी. तभी अचानक ड्राइवर ने रफ़्तार बढ़ा दी और बाबा को कुचलते हुए फरार हो गया.
बाबा की मौके पर ही मौत हो गई. घटना की जानकारी इलाके में आग की तरह फैली. देखते ही देखते हजारों की भीड़ दिल्ली-मथुरा हाईवे पर जमा हो गई. आरोपियों के एनकाउंटर की मांग कर हाईवे जाम कर दिया. जाम खुलवाने पहुंची पुलिस को लोगों ने खदेड़ दिया। पथराव भी किया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी लहूलुहान हो गए.

लोगों ने पुलिस की 5 से 6 गाडियों में तोड़फोड़ की. शीशे तोड़ दिए. इस दौरान फायरिंग भी हुई. हालात बेकाबू होता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. आंसू गैस के गोले छोड़े. इस बीच, CM योगी ने मामले का संज्ञान लिया. अफसरों को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया. कहा- आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा.
एडीएम की गाड़ी पर पथराव: पुलिस और प्रशासन ने काफी देर तक लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ मानने को तैयार नहीं हुई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. जवाब में पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर बुलेट चलाईं. इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई लोग इधर-उधर भागते नजर आए. आक्रोशित भीड़ ने एडीएम प्रशासन की गाड़ी को भी निशाना बनाया और उसमें तोड़फोड़ कर दी. हालात को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. इस दौरान झड़प में करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मी और लोग घायल हुए हैं.

मामले में DIG शैलेश पांडे का कहना है कि शक के आधार पर बाबा एक ट्रक को रोककर चेकिंग कर रहे थे. सुबह कोहरा होने की वजह से पीछे से आ रहे ट्रक ने खड़े ट्रक को टक्कर मार दी. बाबा इसकी चपेट में आ गए. डीआईजी ने साफ किया कि ट्रकों में कोई गोवंश नहीं था. उपद्रव करने वालों पर कार्रवाई करेंगे.

जहां बवाल हुआ, वहां से 25 किलोमीटर दूर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मौजूद थीं. गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर रही थीं. मामला कोसी और छाता थाना क्षेत्र का है.
कौन हैं फरसा वाले बाबा? मथुरा के ‘फरसा वाले बाबा’ का नाम चंद्रशेखर था, जो ब्रज क्षेत्र में एक प्रसिद्ध और निडर गौ रक्षक थे। वे हमेशा हाथ में फरसा लेकर गौ-वंश की रक्षा करते थे. गौरक्षा आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे. और वे प्रखर गौरक्षक और संत के रूप में जाने जाते थे. मथुरा के अंजनोक में वे प्रवास करते थे. वे निडर होकर गौ रक्षा में लगे रहते थे और ब्रज में उनकी काफी लोकप्रियता थी.
घटना के बाद इलाके में तनाव बाबा का पार्थिव शरीर कोसी से अंजनौख स्थित गौशाला ले जाया जा रहा है, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना है. प्रशासन ने वहां भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने. फिलहाल घटना के बाद से इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है.
















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