भगवद्गीता के बाद अब पुतिन को PM मोदी ने भेंट की 2000 साल पुरानी तमिल किताब,‘थिरुक्कुरल’

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दिल्ली में इस समय 18 वें BRICS Summit 2026 को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है, जो भारत मंडपम में 13 और 14 सितंबर को होगा. इस समिट को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के दिल्ली कदम रखते ही दुनिया भर की नजरें भारत पर हैं. इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय मीटिंग शुरू हो चुकी है. रणनीतिक और कूटनीतिक वार्ताओं के इस हाई-प्रोफाइल दौर के बीच पीएम मोदी ने एक ऐसा खास और दिल जीतने वाला कदम उठाया, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है.

पीएम मोदी ने पुतिन को दक्षिण भारत के 2000 साल पुराने महान तमिल ग्रंथ थिरुक्कुरल का रूसी संस्करण भेंट किया है. बता दें कि इससे पहले साल 2025 में पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भगवद्गीता का रूसी अनुवाद भेंट किया था. भारत की तरह से पुतिन को मिला यह तोहफा सिर्फ शिष्टाचार का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके कई मायने हैं…

पीएम मोदी ने पुतिन को ये पुस्तक भेंट करते हुए इसके बारे में जानकारी दीं और कहा कि हमारे सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने में इस पुस्तक की भूमिका रहेगी. पीएम मोदी ने कहा कि यह 2000 हजार साल पहले लिखी गई है. मानव जीनव के विषयों पर है, रूसी भाषा में है, मुझे विश्वास है कि आपसी संबंध को मजबूत करेगी.

क्या है थिरुक्कुरल? थिरुक्कुरल तमिल साहित्य की सबसे प्राचीन और महान कृतियों में से एक है. इस महान ग्रंथ की रचना करीब 2000 साल पहले महान तमिल कवि और दार्शनिक थिरुवल्लुवर ने की थी. इसे तमिल संस्कृति का पंचम वेद या जीवन का मार्गदर्शक ग्रंथ माना जाता है.

इस ग्रंथ की सबसे बड़ी खासियत इसकी द्विपदीय पद्य शैली (Couplets) है. इसमें कुल 1,330 छोटे-छोटे श्लोक हैं, जिन्हें कुरल कहा जाता है. ये श्लोक जीवन के हर पहलू को बहुत सरल, वैज्ञानिक और प्रभावशाली तरीके से समझाते हैं. यह ग्रंथ मूल रूप से तमिल भाषा में है, लेकिन दुनिया भर के दार्शनिकों और विचारकों ने इसके महत्व को देखते हुए इसका अंग्रेजी और दुनिया की कई दूसरी भाषा में भी ट्रांसलेट किया गया है.

थिरुक्कुरल में किसका जिक्र? थिरुक्कुरल को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है, जिसे पाल्म कहा जाता है, जो मानव जीवन और समाज के हर पहलू को कवर करते हैं:

अरम (धर्म-नैतिकता)
इस खंड में नैतिक आचरण, व्यक्तिगत कर्तव्य, और धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी गई है. यह सिखाता है कि एक इंसान को अपने जीवन में ईमानदारी और सदाचार का पालन कैसे करना चाहिए.

पोरुल (धन/अर्थशास्त्र और राजनीति)
किताब का दूसरा भाग राजनीति, शासन, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र पर आधारित है. इसमें एक अच्छे राजा या नेता के गुण, राज्य के प्रबंधन, और धन के उचित उपयोग के बारे में सटीक नीतियां बताई गई हैं जो आज के आधुनिक राजनीतिक परिवेश में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं.

इन्बम (प्रेम)
किताब के इस आखिरी भाग में पारिवारिक जीवन, प्रेम, और भावनाओं की सुंदरता का मार्मिक वर्णन किया गया है.

सरल शब्दों में कहें तो, यह ग्रंथ इंसान को जीना सिखाता है, यह बताता है कि समाज में कैसे रहना चाहिए, सरकार कैसे चलानी चाहिए और मानसिक शांति कैसे प्राप्त करनी चाहिए.

कूटनीति और संस्कृति का अनूठा संगम: थिरुक्कुरल को रूसी राष्ट्रपति को भेंट करना भारत समेत दक्षिण भारत के लिए भी बहुत खास है. पीएम मोदी के कदमों में दक्षिण भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता देने की झलक लगातार दिखाई दे रही है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को थिरुक्कुरल का रूसी ट्रांसलेट भेंट करना भी इसी कड़ी में देखा जा सकता है. इससे पहले संसद के नए भवन में तमिल परंपरा से जुड़े ऐतिहासिक सेंगोल को स्थापित कर उसे देश की लोकतांत्रिक यात्रा से जोड़ा गया था. तमिल भाषा, संस्कृति और दक्षिण भारत की विरासत से जुड़े इन प्रतीकों को राष्ट्रीय विमर्श में जगह देने के जरिए पीएम मोदी दक्षिण भारत के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को लगातार मजबूत करने का संदेश देते नजर आते हैं.

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