लंबे इंतजार के बाद भारत में मॉनसून का आगमन हो गया है. IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार को बताया है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून केरल पहुंच गया है. दक्षिण भारतीय राज्य में लंबे समय से ही बारिश का दौर जारी था, लेकिन आधिकारिक घोषणा अब की गई है. खास बात है कि राज्य में मॉनसून की दस्तक की सामान्य तारीख 1 जून है.
काफी लेट है मॉनसून: मौसम विभाग ने शुरुआत में संभावनाएं जताई थीं कि 26 मई तक मॉनसून केरल में दस्तक दे सकता है. हालांकि, तब 4 दिन में देरी या जल्दी की भी बात कही गई थी. इस लिहाज से माना जा रहा था कि 30 मई तक बारिश का दौर शुरू हो सकता है. तब भी मॉनसून में देरी हुई। वहीं, सामान्य तारीख 1 जून को भी मॉनसून नहीं आया और इस लिहाज से बारिश 4 दिन की देरी से शुरू हुई है.
केरल में तेज बारिश और अलर्ट: IMD ने गुरुवार सुबह के लिए केरल कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था. इनमें अलप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिले शामिल हैं. मौसम विभाग ने कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में बिजली गरजने और चमकने के साथ भारी बारिश होने और हवा की अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है.
मौसम विभाग ने यह भी कहा था कि तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पत्तनमथिट्टा, इडुक्की और त्रिशूर जिलों में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। साथ ही इस दौरान हवा 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है.
UP–दिल्ली कब तक पहुंचेगा मॉनसून: भीषण गर्मी से जूझ रहे भारत के उत्तर पश्चिम राज्यों के लिए मॉनसून राहत की बारिश लेकर आया है. मौसम विभाग के मॉडल के अनुसार, 30 जून तक मॉनसून पूरे देश को कवर कर लेता है. वहीं, राजधानी दिल्ली में इसके पहुंचने की सामान्य तारीख 25 से 30 जून के बीच होती है जबकि, उत्तर प्रदेश में मॉनसून की बारिश 15 जून के आसपास दस्तक दे सकती हैं,
कैसा रहेगा इस बार का मॉनसून: पिछले हफ्ते विभाग ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में कहा कि इस बार मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहेगी. आईएमडी ने कहा कि भारत में इस साल दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है. एलपीए से आशय किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अवधि (जैसे कि एक महीने या एक मौसम) के दौरान दर्ज की गई बारिश से है, जिसका औसत आमतौर पर 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि के आधार पर निकाला जाता है.
देशभर में मौसमी बारिश का औसत एलपीए 87 सेंटीमीटर है, जो 1971 से 2020 तक के आंकड़ों पर आधारित है. अगर मानसून के मौसम में एलपीए के 90 प्रतिशत से कम बारिश होती है, तो आईएमडी इसे ‘अपर्याप्त’ मानता है। सामान्य से कम बारिश का एक कारण अल-नीनो की स्थिति का उभरना हो सकता है, जिसके चलते देश में मानसून के मौसम में कम पानी बरसता है.















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