पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) चेस्ट अस्पताल आजाद नगर में गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. डिंपल सोनी पर उनके ही कार्यालय में हमला किए जाने का मामला सामने आया है. पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने तीन स्टाफ नर्सों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
गुरुवार दोपहर कार्यालय में बंद कर की थी मारपीट: डॉ. डिंपल सोनी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गुरुवार दोपहर वह अपने कार्यालय में बैठकर कार्य कर रही थीं. इसी दौरान चिकित्सालय में तैनात स्टाफ नर्स पपनेश, नूतन कुमारी और रीता वर्मा एक साथ उनके कक्ष में पहुंचीं. आरोप है कि तीनों ने कमरे में मौजूद अर्दली को बाहर भेजकर दरवाजा बंद कर लिया और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी.
तहरीर के अनुसार, पपनेश ने पीछे से उनके हाथ पकड़ लिए और गला दबाने का प्रयास किया, जबकि नूतन कुमारी ने चेहरे, गले और शरीर पर थप्पड़ मारे. मारपीट के दौरान उनका चश्मा गिर गया और आंख में भी चोट लगी. वहीं, थप्पड़ लगने से उनका ऊपरी होंठ कट गया। आरोप है कि रीता वर्मा ने जूता निकालकर उनकी पिटाई की और तीनों ने जान से मारने की धमकी भी दी.
निदेशालय जाकर डॉक्टर ने दी थी जानकारी: डॉ. सोनी ने बताया कि किसी तरह वह कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर निकलीं और खुद को सुरक्षित किया. इस दौरान अस्पताल के अनुचर रामराज ने यूपी-112 पर सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। घटना की जानकारी मिलने पर ईएसआई श्रम चिकित्सा सेवा के निदेशक ने डॉ. सोनी को तत्काल निदेशालय बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली. नवाबगंज थाना प्रभारी राजकेसर ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर तीनों स्टाफ नर्सों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
नर्सों का आरोप- शिकायत करने पर रंजिश रखती थी डॉक्टर: वहीं तीनों नर्सिंग सिस्टर पपनेश, नूतन कुमारी और रीता वर्मा का नवाबगंज पुलिस पर पक्षपात करने का खुला आरोप है. उनका कहना है कि 18 तारीख की शाम को तहरीर जागेश्वर चौकी इंचार्ज राघव को नवाबगंज थाने जाकर दी गई और उनसे मेडिकल कराने के लिए कहा गया, क्योंकि उनके साथ मारपीट की गई थी लेकिन चौकी प्रभारी ने विवेचना करने की बात कहते हुए मेडिकल कराने से मना कर दिया था. शनिवार को बयान देने के लिए थाने बुलाया गया, तब उन्हें मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिली.
उनका आरोप है कि डॉक्टर डिंपल सोनी के खिलाफ अनगिनत शिकायतें हैं. निदेशक से अस्पताल के दर्जनों लोगों ने इसमें मेडिकल ऑफिसर, मेट्रन, नर्सिंग सिस्टर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सभी ने सामूहिक रूप से उनके खिलाफ शिकायत की थी, जिसपर हमने भी हस्ताक्षर किए थे. इस बात को लेकर वह रंजिश रखती थीं.
















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