सरकार ने हटाईं पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदियां, 1 जुलाई से बदल जाएगा नियम

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भारत सरकार ने फ्यूल सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने के बाद 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया है. ये प्रतिबंध इस महीने की शुरुआत में इसलिए लगाए गए थे क्योंकि मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो गई थीं और संभावित कमी की आशंका बढ़ गई थी.

इन प्रतिबंधों के तहत व्यावसायिक खरीदारों को खुदरा ईंधन स्टेशनों से पेट्रोल और डीजल खरीदने से रोक दिया गया था. सरकार ने डीजल की खरीद पर डेली सीमा भी तय की थी ताकि वैश्विक स्थिति और बिगड़ने की स्थिति में आम जनता के लिए पर्याप्त फ्यूल उपलब्ध रह सके.

12 जून को लगाए गए थे प्रतिबंध: प्रतिबंध हटाने से कमर्शियल उपभोक्ताओं (इनमें परिवहन संचालक और औद्योगिक उपयोगकर्ता शामिल हैं) को जून में लागू की गई वॉल्यूम संबंधी पाबंदियों के बिना खुदरा ईंधन आउटलेट्स से फिर से खरीदारी करने की अनुमति मिल जाएगी. ये प्रतिबंध पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 12 जून को लगाए गए थे.

उस समय मंत्रालय ने कहा था कि यह आदेश डीजल की काला बाजारी और जमाखोरी को रोकने, खुदरा आउटलेट्स से ईंधन के डायवर्जन को रोकने और नियमित खुदरा उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है. मंत्रालय ने कहा था कि ये उपाय अस्थायी हैं और प्रारंभ में 90 दिनों तक के लिए वैध हैं. साथ ही यह भी कहा गया था कि ये प्रतिबंध राशनिंग का उपाय नहीं हैं और देश में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है.

ईंधन की बिक्री पर सरकार का प्रतिबंध: सरकार ने कमर्शियल यूजर्स के लिए रिटेल आउटलेट्स से फ्यूल खरीदने पर रोक लगा दी थी. इसके साथ ही डीजल की बिक्री को भी नियंत्रित किया गया था, जिसके तहत प्रति ग्राहक या वाहन को अधिकतम 200 लीटर प्रतिदिन तक ही डीजल दिया जा सकता था.

सप्लाई चेन और कमी की आशंका: यह कदम इसलिए उठाया गया था क्योंकि इलाके में तनाव की स्थिति के चलते सप्लाई चेन पर असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया था. साथ ही, स्थानीय स्तर पर ईंधन की कमी होने की आशंका भी लगातार बढ़ रही थी. इससे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ये पाबंदियां लागू की गईं थी.

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