अगर सबकुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम घट सकते हैं. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसके संकेत दिए हैं. पुरी ने कहा कि तेल कीमतों के कुछ सप्ताह तक निचले स्तर पर बने रहने पर पेट्रोल-डीजल के दाम में कटौती पर विचार करना उचित होगा. पुरी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम घटे हैं लेकिन कंपनियां अब भी पश्चिम एशिया संकट के दौरान खरीदे गए कच्चे तेल का ही प्रोसेसिंग कर रही हैं. इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 30 जून की अवधि तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम दाम पर बेचने की वजह से पेट्रोलियम कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
हरदीप सिंह पुरी ने कहा, ‘हम आज जिस कच्चे तेल का उपयोग कर रहे हैं, वो वही है जो हमने दो महीने पहले खरीदा था (उस समय की कीमत पर). अगर ये गिरावट अगले 2-3 महीनों तक जारी रहती है, तो हम देखेंगे. लेकिन ये अभी एक काल्पनिक स्थिति है.’
अब घट चुकी हैं अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें : मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें अब घट चुकी हैं, लेकिन कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल की प्रोसेसिंग कर रही हैं जिसे उन्होंने संकट के पीक समय पर खरीदा था. जब उनसे पूछा गया कि क्या पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती होगी, तो पुरी ने कहा कि यह एक उचित सवाल होगा अगर अगले कुछ हफ्तों तक तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं.
‘2-3 महीनों तक जारी रहती है’…. उन्होंने कहा, ‘हम आज जिस कच्चे तेल का उपयोग कर रहे हैं, वो वही है जो हमने दो महीने पहले खरीदा था (उस समय की कीमत पर). अगर ये गिरावट अगले 2-3 महीनों तक जारी रहती है, तो हम देखेंगे. लेकिन ये अभी एक काल्पनिक स्थिति है.
मंत्री ने ये भी बताया कि विकसित देशों में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 20% की ग्रोथ हुई है और भारत के पड़ोसी देशों में ये ग्रोथ लगभग 35% रही, जबकि भारत में इस संकट के दौरान पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58% की बढ़ोतरी हुई. उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों ने पिछले चार महीनों (28 फरवरी से जून अंत तक) में देश के 1,07,000 रिटेल आउटलेट्स पर बिना किसी सप्लाई रुकावट के काम जारी रखा है. इसी बीच, प्राइवेट ईंधन रिटेलर नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई से अपने नेटवर्क में पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की कटौती की है, जो कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद पहली बड़ी कटौती मानी जा रही है.
निजी रिटेलरों पर भी पड़ सकता है दबाव: इस फैसले से अन्य निजी रिटेलरों पर भी दबाव पड़ सकता है अगर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार स्थिर रहता है. हालांकि, इसमें एक पेच है. सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी के विपरीत, नायरा एनर्जी कई क्षेत्रों में पहले से ही अपेक्षाकृत अधिक कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेच रही थी. इससे उसे कीमतें घटाने की गुंजाइश मिली.
पुरी ने कहा, ‘नायरा ने पेट्रोल की कीमत इसलिए घटाई क्योंकि उसने संकट के समय ₹5 प्रति लीटर बढ़ाया था. उन्होंने सिर्फ वही बढ़ोतरी वापस ली है. जबकि सरकारी तेल कंपनियों ने उस समय कीमतें नहीं बढ़ाई थीं.’
$110 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं तेल की कीमतें: ग्लोबल तेल कीमतें ईरान संघर्ष के दौरान $110 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं. इससे भारतीय सरकारी OMCs को उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने के बजाय बड़ा हिस्सा खुद वहन करना पड़ा है. कच्चे तेल की कीमतें जून के दूसरे हिस्से में तब घटनी शुरू हुईं जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए समझौता हुआ. आमतौर पर तेल कंपनियां कच्चा तेल कम से कम दो महीने पहले खरीदती हैं. इसलिए अभी जिस तेल का उपयोग किया जा रहा है वो अप्रैल या मई की ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था.












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