आज योगिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी मनाई जाती है. योगिनी एकादशी सनातन धर्म में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली एकादशी तिथियों में से एक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है. शास्त्रों में वर्णित है कि इस पवित्र व्रत को निष्ठापूर्वक रखने से हजारों जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने जितना पुण्य प्राप्त होता है. यह व्रत न केवल शारीरिक शुद्धि करता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है.
शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी की तिथि 10 जुलाई यानी आज सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 11 जुलाई की सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा.
इस व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच होगा.
पूजन मुहूर्त
पहला मुहूर्त सुबह 4 बजकर 54 मिनट से लेकर 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा.
दूसरा अभिजित मुहूर्त रहेगा, जो कि दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा.

योगिनी एकादशी पर बनने वाले शुभ योग
लक्ष्मी-नारायण योग इस बार एकादशी शुक्रवार के दिन पड़ रही है. शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित है और एकादशी भगवान विष्णु को. ऐसे में दोनों की संयुक्त पूजा से जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है.
शिववास योग व सुकर्मा योग इस दिन शिववास और सुकर्मा जैसे शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जो किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और मंत्र साधना के फल को कई गुना बढ़ा देते हैं.
मंत्र जाप:पूजा के दौरान या बाद में शांत मन से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.
– ऊं नमो भगवते वासुदेवाय – लक्ष्मी नारायणाय नमः
करें मां तुलसी का ये उपाय: योगिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र और सनातन परंपरा में तुलसी को भगवान विष्णु की सबसे प्रिय अर्धांगिनी माना गया है. मान्यता है कि एकादशी के दिन यदि माता तुलसी से जुड़े कुछ विशेष उपाय किए जाएं, तो भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और घर के सभी आर्थिक संकट, क्लेश और परेशानियां दूर हो जाती हैं. आइए जानते हैं योगिनी एकादशी पर किए जाने वाले तुलसी के कुछ बेहद चमत्कारी उपाय. और पढ़ें
शाम को घी का दीपक और परिक्रमा: एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं. दीपक जलाते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. इसके बाद तुलसी के पौधे की 11 या 21 बार परिक्रमा करें. ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है.
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी दल (पत्ते) के अधूरी मानी जाती है. एकादशी के दिन भगवान विष्णु या श्री कृष्ण को भोग लगाते समय उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखें.
तुलसी की सूखी जड़ों का उपाय: यदि आपके तुलसी के पौधे की कुछ जड़ें सूखी हुई हैं, तो एकादशी के दिन तुलसी माता की थोड़ी सी सूखी जड़ें या मिट्टी लेकर एक पीले कपड़े में बांध लें. इसे भगवान विष्णु के चरणों से स्पर्श कराकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें. माना जाता है कि इससे घर में धन की आवक बढ़ती है और रुका हुआ पैसा वापस मिलता है.
तुलसी नामाष्टक का पाठ: करियर या बिजनेस में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए योगिनी एकादशी के दिन तुलसी के सामने बैठकर ‘तुलसी नामाष्टक’ का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है. यदि आपको यह पाठ याद न हो, तो आप तुलसी माता के 8 नामों (वृंदा, वृंदानी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, कृष्णजीवनी और तुलसी) का 108 बार जाप भी कर सकते हैं.
तुलसी माता को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री: यदि वैवाहिक जीवन में तनाव चल रहा है या विवाह में देरी हो रही है, तो एकादशी के दिन माता तुलसी को एक सुंदर लाल रंग की चुनरी ओढ़ाएं और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करें. ऐसा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन मधुर बनता है.
















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