यूपी में जहां एक के बाद एक एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ महीने बाद ही ये सवालों के घेरे में आ जा रहे हैं. दरअसल, योगी सरकार की महत्वपूर्ण योजना गंगा एक्सप्रेस-वे सड़क पर मवेशियों के प्रवेश से रोकने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर चारदीवारी बनाई गई है. मार्च में सड़क पर वाहनों का संचालन शुरू हुआ, लेकिन जुलाई में ही चारदीवारी ध्वस्त हो गई। जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं.
मेरठ से प्रयागराज तक बने गंगा एक्सप्रेसवे पर मवेशियों को हाईवे पर आने से रोकने के लिए विभाग ने सड़क के दोनों ओर सीमेंट की पट्टी से चारदीवारी बनाई थी। सीमेंट से बनी चारदीवारी छह महीने भी नहीं चल पाई. प्रतापगढ़ के महेशगंज के आईटीडी कैंप कार्यालय आजाद नगर से पुरमई सुल्तानपुर की ओर जा रही सड़क पर प्रीतमपुर पुल के पास चारदीवारी ध्वस्त हो गई जिससे लोग निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाने लगे हैं. मामले को लेकर प्रोजेक्ट मैनेजर विजय इग्गले ने बताया कि जांच करवाकर शिकायत भेजी जाएगी। निजी कंपनी की टीम लगातार मॉनीटरिंग कर रही है.
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सड़क कई जगह धंसी: उधर, मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर बीते गुरुवार को हुई बारिश ने निर्माण और मेंटेनेंस की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए. बारिश के बाद परतापुर से डासना तक कई स्थानों पर सड़क किनारे भारी मिट्टी कटान होने से सड़क में दरारें पड़ गईं और कई हिस्से धंस गए। जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है.
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार को परतापुर से डासना तक मौके का जायजा लिया गया. जांच के दौरान बहादुरपुर अंडरपास से लेकर डासना तक कई स्थानों पर बारिश के पानी की जलनिकासी के लिए बनाई गई शूटडेन तेज बहाव में क्षतिग्रस्त मिलीं. मिट्टी बह जाने से सड़क के किनारे कई हिस्से खोखले हो गए हैं. काशी टोल प्लाजा के पास धर्मकांटे के निकट सड़क का हिस्सा बैठ गया है. वहीं बहादुरपुर अंडरपास के ऊपर भारी मिट्टी कटान से गड्ढा बन गया है. लोगों का कहना है कि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो हादसा हो सकता है.
कई स्थानों पर सर्विस रोड पूरी तरह से बंद: मुरादाबाद गांव के निकट भी करीब 20 मीटर तक सड़क किनारे बना डिवाइडर बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया. अच्छरोंडा और बहादुरपुर क्षेत्र में किसानों की सुविधा के लिए बनाई सर्विस रोड पर भी एक्सप्रेसवे की ढलान से भारी मात्रा में मिट्टी आकर जमा हो गई. कई स्थानों पर सर्विस रोड पूरी तरह बंद हो गई, जिससे किसानों का खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. मुरादाबाद गांव के पास भी यही स्थिति देखने को मिली.
















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