बीते लगभग 9 दिनों से देश के ज्यादातर हिस्सों मे जमकर बरसात हुई. मुंबई-गुजरात के कई शहरों में तो बारिश ने तहलका ही मचा दिया. एक तरफ जहां दावा किया जा रहा है कि इस बार मॉनसून कमजोर होगा और बारिश कम होगी, लेकिन मॉनसून की शुरुआत ही जोरदार हुई. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अल नीनो का असर भारत में नहीं होने वाला? इस सवाल का जवाब है नहीं.
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट ने करोड़ों देशवासियों और खासकर अन्नदाता किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. जून के सूखे के बाद जुलाई की शुरुआत में जिस मॉनसून ने धमाकेदार रिकवरी की थी, उस पर अब अल नीनो का काला साया मंडराने लगा है.
मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि यह राहत बहुत कम समय के लिए है और अल नीनो एख बार फिर मॉनसून की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए तैयार है. आखिर अगले 5 दिनों में मौसम में ऐसा क्या पलटने वाला है, जिसने वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है?
IMD का मानना है कि 10 जुलाई से 15 जुलाई के बीच उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत समेत पश्चिमी तटीय इलाकों में बारिश में भारी कमी आने की संभावना है. वर्तमान में जो कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ था, वह अब कमजोर होकर आगे निकल बढ़ चुका है, जिससे आसमान से बादलों की आवाजाही कम हो रही है.
अल नीनो का खेल? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मॉनसून का यह उतार-चढ़ाव प्रशांत महासागर में एक्टिव हो रहे अल नीनो के कारण हो रहा है. अल नीनो के प्रभाव वाले सालों में मॉनसून लगातार एक जैसी बारिश करने के बजाय टुकड़ों में काम करता है. इसमें कुछ दिन तो बहुत भारी बारिश होती है, लेकिन उसके बाद एक लंबा सूखे का दौर आता है. हालांकि, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जुलाई के आखिरी दिनों में मॉनसून का एक और सक्रिय दौर आएगा, लेकिन तब तक देश के किसानों को आसमान की तरफ टकटकी लगाए देखना होगा.
खेती और फसलों पर संकट: जुलाई के बीच में आने वाले इस सूखे के कारण देश में कुल मानसूनी बारिश का आंकड़ा एक बार फिर सामान्य से कम श्रेणी में जा सकता है. कृषि एक्सपर्ट्स के मुताबिक, धान और दूसरी खरीफ फसलों के लिए यह समय बहुत ही नाजुक है. हाल ही में बोई गई फसलों को शुरुआती विकास के लिए लगातार नमी की जरूरत होती है. अगर इस समय लंबे समय तक बारिश रुकती है, तो बिना सिंचाई वाले इलाकों में नए पौधे सूख सकते हैं.
















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