इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, बीजेपी सांसदों ने यूं किया वेलकम

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NEET विवाद और देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद पहुंचे. 25 जुलाई को पद छोड़ने के बाद संसद के मॉनसून सत्र में उनकी यह पहली सार्वजनिक मौजूदगी थी. संसद परिसर के मकर द्वार पर सुबह से ही बीजेपी और NDA के तमाम सांसद उनके स्वागत के लिए एकजुट थे. जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान की गाड़ी संसद परिसर में दाखिल हुई, सांसदों ने उनका गर्मजोशी से अभिवादन किया. लोकसभा सांसद संजय जायसवाल ने उन्हें पटका पहनाया, जबकि अन्य साथियों ने उन्हें एक खास टोपी भेंट की और ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के जोरदार नारे लगाकर एकजुटता दिखाई.

राष्ट्र-विरोधी ताकतों को रोकने के लिए दिया इस्तीफा: धर्मेंद्र प्रधान-गौरतलब है कि देशव्यापी जनआक्रोश और छात्रों के भारी दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था. अपने इस्तीफे पर सफाई देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि उन्होंने यह कदम छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की सुरक्षा के लिए और NEET पेपर लीक विवाद का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही राष्ट्र-विरोधी ताकतों को बेनकाब करने के लिए उठाया है.

बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन की सबसे मुख्य मांग थी. NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और देश भर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्रों का एक विशाल विरोध प्रदर्शन चल रहा था. केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के तीसरे दौर से ठीक पहले धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा हुई थी. सरकार द्वारा इस प्रमुख मांग को स्वीकार किए जाने के बाद ही CJP ने अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया था.

विपक्ष का संसद में जोरदार हंगामा: एक तरफ जहां सत्तारूढ़ एनडीए सांसद धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने उनके आते ही अपना रुख और आक्रामक कर लिया. हाथ में प्लेकार्ड लेकर पहुंचे विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह कमजोर करने का आरोप लगाया. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने ‘शिक्षा चोरी’ के नारे लगाए. यह हंगामा ऐसे समय में हुआ जब संसद में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए प्रस्तावित ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पर महत्वपूर्ण चर्चा होनी है.

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