सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी आज, 23 अगस्त रविवार को मनाई जा रही है. इसे श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संतान की खुशहाली, परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए इसका विशेष महत्व माना जाता है. इस बार एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात करीब 2 बजे शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर गृहस्थों के लिए व्रत 23 अगस्त को रखा जा रहा है.
पुत्रदा एकादशी को कुछ स्थानों पर पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है. संतान की कामना रखने वाले दंपति और अपनी संतान के स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि की प्रार्थना करने वाले लोग विशेष रूप से यह व्रत रखते हैं.
इस एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह चातुर्मास के दौरान आती है. इस अवधि में भगवान विष्णु की आराधना, संयम, जप और दान को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है.
शुभ मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, 23 अगस्त को भगवान विष्णु की पूजा के लिए सुबह 7:23 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक का समय शुभ बताया गया है.वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा.अलग-अलग शहरों के पंचांग में कुछ मिनट का अंतर संभव है.
एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 अगस्त, रात 2:00 बजेएकादशी तिथि समाप्त: 24 अगस्त, सुबह 4:18 बजेव्रत: 23 अगस्त 2026, रविवारपारण: 24 अगस्त 2026, द्वादशी तिथि में
दिल्ली क्षेत्र के पंचांग के अनुसार गृहस्थ व्रत के पारण का समय 24 अगस्त को दोपहर 1:26 बजे से 3:55 बजे तक बताया गया है.पारण के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें.
ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा: सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थल की सफाई करें.इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें.भगवान विष्णु को पीले फूल, चंदन, फल और नैवेद्य अर्पित करें.पूजा में तुलसी दल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है.
इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.’ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप भी किया जा सकता है.शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें .व्रत कथा का श्रवण करें.
व्रत में क्या खाएं? एकादशी व्रत में सामान्यतः अनाज और चावल का सेवन नहीं किया जाता.व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रख सकते हैं.फल, दूध, मखाना, साबूदाना और व्रत में मान्य सात्विक खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है.स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर उपवास करने से बचना चाहिए.
पुत्रदा एकादशी पर दान का भी महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहायता देना शुभ माना जाता है.भगवान विष्णु की पूजा के साथ किसी जरूरतमंद की मदद करना भी इस दिन के धार्मिक आचरण का हिस्सा माना जाता है.
पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, महिष्मती नगरी के राजा महीजित बहुत धार्मिक और प्रजा का ध्यान रखने वाले थे, लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था.राजा की चिंता देखकर ऋषियों ने उन्हें श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी.
ऋषि लोमश के बताए अनुसार राजा और प्रजा ने श्रद्धा से एकादशी व्रत किया और उसका पुण्य राजा को समर्पित किया.मान्यता है कि इसके बाद राजा को संतान की प्राप्ति हुई.इसी कारण पुत्रदा एकादशी को संतान सुख और संतान की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है.
आज क्या करें? भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. विष्णु मंत्र का जाप करें. तुलसी दल अर्पित करें. एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें. जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करें. द्वादशी के दिन निर्धारित समय में व्रत का पारण करें.
















Leave a Reply