PM मोदी के सेवा भाव के 25 साल पूरे, विकसित भारत के लिए दिया ‘We Will Do It…’ नारा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बतौर CM और PM 25 साल का कार्यकाल पूरा किया. दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बोले- ” मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं. जीवन में क्या बनूंगा, कभी सोचा ही नहीं। जिसने गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया.

उन्होंने कहा, “जिसने मेरा विरोध किया, उसने मुझे लोकतंत्र की शक्ति समझाई. मैंने ईश्वर से मांगा की कि सीखना कभी कम न हो.”

पीएम मोदी ने कहा, “आज जितना पीछे मुड़कर देखता हूं, उतना कृतज्ञता का भाव ही आता है. हर घटना ने मुझे कुछ न कुछ ही सिखाया है. मुझे नम्र होना सिखाया.”

2015-25 के दशक में खेती की वृद्धि दर सबसे ज्यादा: पीएम मोदी ने कहा, “आज मेड इन इंडिया फोन का जलवा है. कभी भारत में ब्लैकआउट हेडलाइन बनती थी, आज सोलर पावर के चर्चे होते हैं. आज खेती का उदाहरण भी है. आजादी के बाद खेती के बढ़ने की दर किसी दशक में रही तो 2015-25 के दशक में सबसे ज्यादा रही.”

उन्होंने कहा, “ये तभी होता है कि नीयत साफ और नीति स्पष्ट होती है. सबका साथ, सबका विकास, यही मेरे लिए सुशासन का आधार रहा है. हमारे देश को वोटों के हिसाब से बांट दिया गया. समस्या सबकी है तो समाधान भी सबके लिए होगा.”

2014 में देश निराशा में डूबा था, कई चुनौतियां थी: पीएम मोदी ने कहा, “जब गुजरात पहुंचा तो प्रशासनिक व्यवस्था का ज्यादा ज्ञान नहीं था, तब सिर्फ जनशक्ति का भरोसा था. इसी विश्वास को मैंने अपना सामर्थ्य बनाया। मैंने जनता को साथ लेकर निर्णय लिए, नीतियां बनाई और इन्हें लागू किया. यही मंत्र- वी विल डू इट…जब जनता साथ हो तो परिणाम ही आते हैं। गुजरात ने करके दिखाया.”

पीएम मोदी ने कहा, “तब विकराल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं. देश का हर नागरिक नया रास्ता खोज रहा था. भारत की इकोनॉमी को लेकर दुनिया कहने लगी थी- इट्स अ गॉन केस. तब कोई ज्योत दिखती नहीं थी. निराशा में डूबे देश को आशा की जरूरत थी.

उन्होंने कहा, “मैंने वही काम किया, जो मुझे आता था. मैंने लोगों के साथ मिलकर काम किया और उनके साथ मिलकर फिर दोहराया- वी विल डू इट. अब तस्वीर बदल गई है.”

25 साल में देश कहां पहुंचा, ये अहम: पीएम मोदी ने कहा, “हमने इस राष्ट्र में जन्म लिया है, ये एहसास ही अमृत है। इसके सामने सत्ता सुख कुछ नहीं है। पद-प्रतिष्ठा तो कहीं भी मिल सकता है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि नहीं मिलेगी। वो भारत, जिसने अंधकार के युग में भी मानवता को ज्ञान दिया, मूल्यों का प्रकाश दिया, उसकी सेवा का मौका अमूल्य है। 25 सालों का आकलन इससे नहीं होगा कि मैं कहां पहुंचा, बल्कि इससे होगा कि मेरा देश कहां पहुंचा।”

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