CM योगी पर मानहानि का केस करने कोर्ट पहुंचे अजय राय, अयोध्या मछली भोज विवाद में नया मोड़

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उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मछली भोज को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है. मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर मानहानि का केस करने लखनऊ सिविल कोर्ट पहुंच गए. उन्होंने खुद पर अयोध्या में मछली खाने के झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया और वकील के जरिए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय की अदालत में प्रार्थन पत्र दाखिल किया है. आगे दलील और जिरह के बाद कोर्ट मुकदमा दर्ज या खारिज करने का फैसला करेगा. अजय राय ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि 23 अगस्त को अयोध्या में कांग्रेस नेता राम निहाल निषाद द्वारा एक जनसभा और कार्यक्रम का आयोजन था. उनके बुलावे पर निषाद समाज के कार्यक्रम में शामिल होने वह अयोध्या गए थे. निषाद समाज के लोगों ने सभा के बाद कार्यक्रम में अपनी परंपरा के अनुसार मत्स्य (मछली) भोज का आयोजन किया था.

अजय राय ने कहा कि चूंकि वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं, इस वजह से कार्यक्रम स्थल पर उनके पहुंचने के समय मीडिया द्वारा उनकी उपस्थिति को कैमरे में कैद किया गया. उनके कार्यक्रम स्थल से जाने के बाद मछली भोज के कार्यक्रम की फोटो खींची गई, जहां निषाद समाज के लोग भोज कर रहे थे. मीडिया में वही फोटो देखकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार और सामाजिक छवि धूमिल करने के मकसद से बिना वास्तविकता को जाने 24 अगस्त को रायबरेली में आयोजित एक जनसभा में योगी ने यह भ्रांति फैलाई कि उन्होंने पहले तो अयोध्या में रामलला के दर्शन किए और फिर मछली खाई.

अजय राय का कहना है कि सभा का वीडियो और खबरें सोशल मीडिया, टीवी, अखबार और अन्य माध्यमों से लाखों-करोड़ों लोगों ने देखीं. उनके जानने वाले लोगों ने जब उन्हें इस बयान के बारे में बताया तो वह बहुत आहत हुए. इससे उनकी सामाजिक और पारिवारिक प्रतिष्ठा भी धूमिल हो गई. उनकी सामाजिक और राजनैतिक छवि को नुकसान पहुंचाया गया. निरपराध होते हुए उन्हें समाज के लोगों के बीच जाकर सफाई देने के लिए बाध्य होना पड़ा. राय ने कहा कि इन वजहों से वह वाद दाखिल करने और न्याय पाने के लिए न्यायालय की शरण में पहुंचे हैं.

सीएम योगी को लिखा था खुला पत्र: इसके पहले अजय राय ने इस मामले को लेकर सीएम योगी को एक खुला पत्र लिखा था. अजय राय का कहना है कि अयोध्या दर्शन के दौरान उन पर मछली की दावत उड़ाने और माफिया के सामने थर-थर कांपने का आरोप लगाया गया जबकि अमिट सत्य है कि वह शाकाहारी हैं। जिस कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति का उल्लेख किया गया, वह निषाद समाज के निमंत्रण पर वहां गए थे. कार्यक्रम के बाद आयोजकों ने अपने समाज के लिए भोज किया था. यह उनका संवैधानिक अधिकार था कि वे उसमें क्या खाएं.

अजय राय ने इसके पहले चुनौती दी थी कि यदि उनके मछली खाने की कोई सत्य प्रमाणित फोटो या वीडियो हो तो उसे जनता के सामने लाया जाए. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनके मछली खाने की बात प्रमाणित हो जाएगी तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे. अजय राय ने यह भी कहा कि जहां तक माफिया से डरने का सवाल है, उनके भाई अवधेश राय की हत्या के बाद उन्होंने किसी माफिया के सामने सिर नहीं झुकाया. करीब 32 सालों तक न्याय के लिए अदालतों में लड़ते रहे.

यूपी में तेज हुई सियासत: यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और उसके पहले अभी से अलग-अलग मुद्दों पर सियासत तेज होने लगी है. मंगलवार को अजय राय ने लखनऊ कोर्ट में पहुंचकर मानहानि का केस करने की प्रक्रिया शुरू की तो राजधानी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई. अजय राय के इस कदम से अब भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तीखी होने की संभावना है.

मछली भोज विवाद क्या है? अजय राय 23 अगस्त को अयोध्या पहुंचे थे. उनके साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्वांचल के प्रभारी अभिषेक दत्त और प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश सिंह भी थे. नेताओं ने हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया और हनुमान चालीसा का पाठ किया. आरोप लगा है कि अजय राय के तारून में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मछली भोज का आयोजन किया गया. भाजपा नेताओं ने इसे लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. भाजपा नेताओं ने सावन के पवित्र महीने में मछली भोज को सनातन आस्था का अपमान बताते हुए कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाए थे.

वहीं, 24 अगस्त को रायबरेली की जनसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर कांग्रेस पर तंज कसा था. उन्होंने कहा था कि सावन महीने में अयोध्या में मछली का लुत्फ उठाया गया. इसके साथ ही सीएम ने अजय राय पर अपने भाई की हत्या के बाद एक माफिया के सामने घुटने टेक देने का भी आरोप लगाया था. योगी के इन आरोपों पर अजय राय ने कहा कि वह एक सच्चे सनातनी और बाबा विश्वनाथ के अनन्य भक्त हैं. उन्होंने चुनौती दी थी कि यदि उनके मछली खाने का कोई भी फोटो या वीडियो हो तो उसे देश के सामने उजागर किया जाए. अजय राय ने स्पष्ट किया था कि वह कार्यक्रम निषाद समाज का था और उन्होंने अपने समाज के लिए मछली की व्यवस्था की थी.

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