पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO होंगे. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को इसका ऐलान किया. मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया और एयरफोर्स में 38 साल काम किया.
भारतीय वायुसेना में करीब 38 साल तक सेवाएं देने वाले जितेंद्र मिश्रा का करियर लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर वायुसेना की अहम कमान संभालने तक का रहा है. वे 30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से रिटायर हुए हैं. अब रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में अहम जिम्मेदारी दी गई है. जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं.
3 हजार घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव: जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन मिला था. करीब 4 दशक के लंबे करियर में उन्होंने फाइटर पायलट के साथ-साथ कई अहम कमांड और स्टाफ पदों पर काम किया. एक पायलट के तौर पर उनके पास 3000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है. वे फाइटर कॉम्बैट लीडर भी रहे हैं. अपने लंबे करियर में उन्होंने देश के अलग-अलग महत्वपूर्ण सैन्य संस्थानों और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों में काम किया.

देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई: जितेंद्र मिश्रा ने अपनी सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण के दौरान देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की. वे पुणे की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), बेंगलुरु के एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल के पूर्व छात्र रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी प्रशिक्षण लिया. इन संस्थानों का अनुभव उनके सैन्य करियर में काफी अहम रहा.
लड़ाकू स्क्वाड्रन से लेकर बड़े पदों तक: 38 साल के सेवा करियर में जितेंद्र मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. वे एक लड़ाकू स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे. इसके अलावा एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट यानी ASTE में चीफ टेस्ट पायलट की जिम्मेदारी भी निभाई. उन्होंने दो फ्रंटलाइन एयर बेसों के एयर ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर भी काम किया. इसके अलावा निदेशक (ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप), प्रिंसिपल डायरेक्टर (ASR) और एयर मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे.
ASTE की कमान भी संभाली: जितेंद्र मिश्रा को एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट यानी ASTE का कमांडेंट भी बनाया गया था. यह वायुसेना के लिए विमानों और उनकी प्रणालियों के परीक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संस्थान है. इसके अलावा उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में सिद्धांत, संगठन और प्रशिक्षण से जुड़े विभाग में डिप्टी चीफ के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली. वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभालने से पहले वे एकीकृत रक्षा स्टाफ (ऑपरेशंस) के उप प्रमुख थे.
पश्चिमी वायु कमान की संभाली कमान: जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान का कार्यभार संभाला था. यह वायुसेना की महत्वपूर्ण कमानों में से एक है. इस पद पर उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली थी. पंकज मोहन सिन्हा 39 साल से ज्यादा की विशिष्ट सेवा के बाद 31 दिसंबर 2024 को वायुसेना से रिटायर हुए थे. इसके बाद जितेंद्र मिश्रा ने पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली.
दो बड़े सैन्य सम्मानों से सम्मानित: जितेंद्र मिश्रा के लंबे सैन्य करियर को कई महत्वपूर्ण सम्मानों से भी नवाजा गया. उन्हें ‘अति विशिष्ट सेवा पदक’ (AVSM) और ‘विशिष्ट सेवा पदक’ (VSM) मिल चुका है. ये सम्मान उनके सैन्य सेवा के दौरान किए गए उल्लेखनीय कार्यों और योगदान को दर्शाते हैं.
ट्रस्ट में 3 नए सदस्य भी बनाए गए हैं. इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और RSS समर्थक शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं. निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी. यह बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामला सामने आने के 3 महीने के बाद हुआ.
इस मामले में 8 आरोपी जेल में हैं. इसके बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे के बाद रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था.
नए ट्रस्टियों के बारे में जानिए- एडवोकेट मदन मोहन पांडेय- राम जन्मभूमि-बाबरी विवाद मामले में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि से जुड़े पक्ष की दलीलों में भूमिका निभाई. जनवरी 2024 में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके 51 साल के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा.
महेश भागचंदका- विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार और दिल्ली के कारोबारी हैं. 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन के धार्मिक अनुष्ठानों में वह मुख्य यजमान रहे थे. इसके बाद 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान भी यजमान रहे. अशोक सिंघल फाउंडेशन चलाते हैं.
उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं, जिनमें ‘अशोक सिंघल : हिंदुत्व के पुरोधा’, ‘बोलती अनुभूतियां’ और ‘श्री राम मंदिर काव्य यात्रा’ प्रमुख हैं. वह अशोक सिंघल के रिश्तेदार भी हैं. 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन के धार्मिक अनुष्ठानों में वह मुख्य यजमान रहे थे. इसके बाद 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान भी यजमान रहे.
















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