गंगा नदी उफान पर: कानपुर-उन्नाव के गांवों में मकान डूबे, 10 फीट गहराई में चल रही थर्माकोल की नाव

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कानपुर में गंगा नदी उफान पर है, जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर बह रहा है. गंगा के बढ़े हुए पानी की वजह से कानपुर-उन्नाव कटरी के गांवों में पानी भर गया है. कहीं नाव चल रही हैं, तो कहीं लोग कमर तक के पानी से गांव से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की तरफ जा रहे हैं. उन्नाव में तो जुगाड़ की नाव थर्माकोल से बनाकर बच्चे और महिलाएं गांव की गलियों में दिखाई दीं. गंगा नदी के बढ़े जलस्तर की वजह से कानपुर-उन्नाव में करीब 60 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है.

कानपुर गंगा कटरी की बात की जाए तो यहां भोपालपुरवा, भगवानदीन का पुरवा और बनियापुरवा में पानी घुस गया है। इसके साथ ही रामेल नगर, चिरान, ईश्वरीगंज और पिपरिया गांव में भी पानी पहुंच गया है. घरों से लोग 3 से 4 फीट पानी के बीच से निकल रहे हैं। कटरी के गांवों में जाने के लिए ग्रामीण ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं. जहां गांव में ट्रैक्टर नहीं जा सकता, वहां से नाव के सहारे लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं.

उन्नाव के हाइवे किनारे गांव में महिला थर्माकोल की नाव से निकली.

उन्नाव के शुक्लागंज में गंगा नदी के रौद्र रूप से 500 से ज्यादा मकान डूब गए हैं. गंगा किनारे शुक्लागंज के चंपाखेड़ा, नितुआ, गगनीखेड़ा, मोहम्मद नगर और गोताखोर इलाके के मकान डूब गए हैं. यहां घरों से निकलने के लिए नाव का इस्तेमाल किया जा रहा है. गलियों में जलभराव से लोग करीब 15 दिन से परेशान हैं.

शुक्लागंज में नाव से गांव की गलियों में आते-जाते लोग.

उन्नाव के ही जाजमऊ गंगा हाईवे किनारे बसे गांवों में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद हालात खराब हैं. यहां करीब 20 गांव गंगा के बढ़े पानी की चपेट में आ गए हैं. यहां भी 700 से ज्यादा घर जलभराव से प्रभावित हैं. गांव की गलियों में लोग नाव से हाईवे किनारे तक पहुंच रहे हैं. गांव जाने वाले रास्तों में 3 फीट तक पानी भरा है, तो वहीं कई जगह रास्तों में 10 फीट तक पानी भरा हुआ है. दूसरी तरफ गांव की गलियों में थर्माकोल की नाव से महिलाएं और बच्चे खतरे के बीच गंगा नदी के पानी में दिखाई दे रहे हैं. यहां गंगा के पानी से मुख्तार नगर, कल्लू नगर, त्रिभुवन खेड़ा, 40 फीट रोड, 16 बीघा गांव, पीपर खेड़ा, जुलाखन खेड़ा, नया खेड़ा, मंशा खेड़ा, रजवा खेड़ा और मर्दन खेड़ा में जलभराव है.

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