3 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं, 15 लाख की आय पर अब 20% से ज्यादा नहीं लगेगा टैक्स

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर स्लैब में बड़े बदलावों की घोषणा की है. अब स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार कर दिया गया है. इस व्यवस्था में तीन लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. 3 से 7 लाख तक की कमाई पर 5 प्रतिशत इनकम टैक्स देना होगा. 7 से 10 लाख की आय होने पर 10 फीसदी की दर से आय कर लगेगा. 10 से 12 लाख के टैक्सेबल इनकम पर 15 फीसदी की दर से आयकर लगेगा. 12 से 15 लाख के टैक्सेबल इनकम पर 20 फीसदी आयकर लगेगा. 15 लाख से ज्यादा के टैक्सेबल आय पर 30 फीसदी की दर से आयकर लगेगा.

सोना और चांदी पर घटी कस्टम ड्यूटी, अब 6% ही देना होगा

कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली 3 दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट दी जाएगी. कीमती धातुओं के संबंध में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सोने और चांदी पर सीमा शुल्क घटाकर 6% और प्लैटिनम पर 6.5% की जाएगी. नवाचार, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाएगा. बुनियादी अनुसंधान और प्रोटोटाइप विकास के लिए अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान कोष की स्थापना की जाएगी. वाणिज्यिक स्तर पर निजी क्षेत्र द्वारा संचालित अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का वित्तपोषण पूल भी बनाया जाएगा.’

बुनियादी ढांचे में बंपर निवेश

अगले 5 वर्षों में बुनियादी ढांचे के लिए मजबूत राजकोषीय समर्थन बनाए रखने का सरकार का प्रयास. पूंजीगत व्यय के लए 11,11,111 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. ये भारत की GDP का 3.4% है. राज्य सरकारों द्वारा बुनियादी ढांचे निवेश का समर्थन करने के लिए दीर्घकालिक ब्याज मुक्त ऋण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

बाढ़ से निपटने के लिए 25 हजार बस्तियों में बनेगी मौसम के अनुकूल सड़क

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा,’25 हजार ग्रामीण बस्तियों को सभी मौसमों के अनुकूल सड़कें प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चरण 4 का शुभारंभ किया जाएगा. बिहार में अक्सर बाढ़ आती रहती है. नेपाल में बाढ़ नियंत्रण संरचनाओं के निर्माण की योजना अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई है. हमारी सरकार 11,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. असम, जो हर साल बाढ़ से जूझता है, उसे बाढ़ प्रबंधन और संबंधित परियोजनाओं के लिए सहायता मिलेगी. बाढ़ के कारण व्यापक नुकसान झेलने वाले हिमाचल प्रदेश को भी बहुपक्षीय सहायता के माध्यम से पुनर्निर्माण के लिए समर्थन मिलेगा. इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड, जिसे भूस्खलन और बादल फटने से काफी नुकसान हुआ है, उसे भी मदद दी जाएगी.’

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