तनाव से दूर रहना चाहते हैं तो लहसुन खाएं। यह सुनने में जरूर अटपटा लग रहा है लेकिन सौ आना सही है. यह तथ्य इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के हालिया शोध में सामने आया है. डीन साइंस एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. बेचन शर्मा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने लहसुन में एक ऐसे बायो एक्टिव कंपाउंड (जैव सक्रिय यौगिक) को खोज लिया है, जो अवसाद (डिप्रेशन) के उपचार में बेहद प्रभावी है और इसके दुष्प्रभाव को भी कम करता है.
प्रो. शर्मा ने अवसाद रोधी गुणों की तलाश में लहसुन का जलअर्क तैयार कर इसमें से 35 जैव सक्रिय यौगिक निकाले. अवसादरोधी के रूप में इन यौगिकों की भूमिका का पता लगाने के लिए बायो इनफार्मेटिक्स विभाग के प्रो. अनूप सोम व उनकी टीम के सहयोग से एक-एक कर 35 यौगिकों की अवसाद रोधी की जांच की. ऐसे पांच मुख्य यौगिकों की पहचान की, जिनकी मस्तिष्क के उस प्रोटीन के साथ अच्छी बाइंडिंग है, जिन्हें अवसाद के लिए जिम्मेदार माना जाता है. टीम ने इन पांच में एक ऐसे बायो एक्टिव कंपाउंड (जैव सक्रिय यौगिक) की पहचान करने में सफलता पाई है जो सबसे ज्यादा प्रभावी है. यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल मालीक्यूलर न्यूरो बायोलाजी के हालिया अंक में प्रकाशित हुआ है.
प्रो. शर्मा ने बताया कि इस यौगिक का प्रयोग चूहों पर किया गया. प्रयोगशाला में चूहों के भीतर कृत्रिम रूप से अवसाद पैदा किया गया। इसके बाद उनको खोजे गए सबसे प्रभावी यौगिक की डोज दी गई. इसका परिणाम सकारात्मक रहा. चूहों में 60 से 70 प्रतिशत तक अवसाद कम हो गया. उन्होंने बताया कि इसका सिंथेटिक मालीक्यूल नहीं मिल पाया है. ऐसे में प्रयोगशाला में इस मालीक्यूल को तैयार कर दवा बनाई जाए तो यह दवा अवसाद रोकने की दिशा में प्रभावी होगी.
















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