DNA विवाद में CM योगी की एंट्री: सपा प्रमुख को दी नसीहत, कहा- सभ्य समाज अभद्र भाषा को सहन नहीं कर सकता

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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और सपा प्रमुख अखिलेश के बीच डीएनए को लेकर शुरू विवाद में अब सीएम योगी की एंट्री हुई है. योगी ने सोमवार को बिना नाम लिए अखिलेश याद को नसीहत दी.

सीएम योगी ने कहा- सपा से अच्छे व्यवहार की उम्मीद करना बेकार है, लेकिन सभ्य समाज उनके अभद्र और अश्लील बयानों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। सपा के शीर्ष नेतृत्व को अपने सोशल मीडिया हैंडल की समीक्षा करनी चाहिए.

ब्रजेश पाठक ने कहा- अखिलेश जी, चेहरा साफ कीजिए, आईने से मत झगड़िए: इससे पहले, सोमवार सुबह एक बार फिर ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर सीधे निशाना साधा। पाठक ने X पर लिखा- अखिलेश यादव जी, आप डीएनए के सवाल पर बहुत भड़के हुए हैं. मैंने ये कह क्या दिया कि सपा के डीएनए में खराबी है, आप आपे से उसी तरह बाहर हो गए जैसे 10 साल पहले यूपी की सत्ता से बाहर हो गए थे.

आपकी पार्टी की राजनीति ही जातिवाद और तुष्टीकरण पर टिकी रही है. मुस्लिम तुष्टीकरण आपकी राजनीति की दाल-रोटी है. आपने सिग्नेचर से आतंकियों से जुड़े 14 केस एक साथ वापस लिए. किस किस को गालियां देते फिरेंगे आप? , अपना चेहरा साफ कीजिए, आईने से मत झगड़िए.

दरअसल, 16 मई को सपा की मीडिया सेल की आपत्तिजनक पोस्ट ने हंगामा खड़ा कर दिया. इसमें ब्रजेश पाठक के डीएनए को लेकर सवाल किए गए. उनके डीएनए को सोनागाछी और जीबी रोड (रेड लाइट एरिया) से जोड़ा गया.

इसे लेकर ब्रजेश पाठक आग बबूला हो गए. उन्होंने 17 मई को अखिलेश और डिंपल यादव से सीधे सवाल पूछे कि क्या यही आपकी पार्टी की भाषा है. इस मामले में भाजपा की ओर से FIR भी दर्ज कराई गई.

जवाब में अखिलेश ने कहा- हम अपने लोगों को समझाएंगे, लेकिन आप भी अपनी भाषा पर संयम रखें. इसके बाद पाठक ने एक और पोस्ट करके लिखा कि सपा के लोगों को लोहिया और जेपी को पढ़ना चाहिए. ब्रजेश पाठक के समर्थन मे डिप्टी सीएम केशव मौर्य भी कूदे. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा-परिवारवादी समाजवाद अब पूरी तरह से लठैतवाद में बदल चुका है.

विवाद की शुरुआत कैसे हुई? सपा की मीडिया सेल ने शुक्रवार रात 8:44 बजे एक पोस्ट किया. इसमें ब्रजेश पाठक पर निशाना साधते हुए उनके ‘DNA’ पर तंज कसा. लिखा- ब्रजेश पाठक का खुद का डीएनए सोनागाछी और जीबी रोड का है. उन्हें खुद नहीं पता कि उनका असली डीएनए क्या है, कहां का है और किसका है.

इस पर ब्रजेश पाठक भड़क गए. उन्होंने अखिलेश से सवाल पूछा. अखिलेश जी, ये आपकी पार्टी की भाषा है? किसी के दिवंगत माता-पिता के लिए शब्दों का ये चयन है? क्या डिंपल जी इस स्त्री विरोधी और पतित मानसिकता को स्वीकार करेंगी? सोचिएगा.

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