भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव किया है. इसका असर पहले ही दिन से साफ दिखाई देने लगा है. दिल्ली से वाराणसी, लखनऊ और बिहार जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में साल बाद तत्काल कोटे में सीटें खाली देखी गईं. पहले जहां इन रूट्स की तत्काल टिकट कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाती थीं, वहीं अब बुकिंग समय के काफी बाद तक टिकटें उपलब्ध शो हो रहीं हैं.

दरअसल, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में ऐलान किया था कि तत्काल टिकट अब सिर्फ आधार ओटीपी ऑथेंटिकेशन के जरिए ही बुक किए जा सकेंगे. यह नियम 1 जुलाई 2025 से लागू कर दिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य है- तत्काल टिकट बुकिंग को ज्यादा पारदर्शी बनाना और जरूरतमंद यात्रियों को प्राथमिकता देना. रेलवे का कहना है कि बुकिंग विंडो खुलने के बाद शुरुआती 30 मिनट तक एजेंट तत्काल टिकट बुक नहीं कर सकेंगे.
नियमों में क्या बदला है?
- अब IRCTC वेबसाइट या IRCTC मोबाइल ऐप से तत्काल टिकट सिर्फ आधार सत्यापित यूजर्स ही बुक कर सकेंगे.
- एजेंट बुकिंग के लिए भी OTP आधारित आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है.
- 15 जुलाई से काउंटर या एजेंट के जरिए टिकट बुक कराने पर भी आधार अनिवार्य होगा.
- यानी सभी तत्काल बुकिंग के लिए आधार आधारित ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) सत्यापन अनिवार्य हो जाएगा, जिसमें यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) काउंटर और अधिकृत रेलवे एजेंट के जरिए की गई बुकिंग भी शामिल है.
- एजेंट्स को तत्काल टिकट बुकिंग के पहले 30 मिनट तक प्रतिबंधित कर दिया गया है.
- AC क्लास: आम यात्री सुबह 10:00 से बुकिंग कर सकेंगे, एजेंट 10:30 के बाद.
- Non-AC क्लास: आम यात्री सुबह 11:00 से और एजेंट 11:30 के बाद बुकिंग कर सकेंगे.
क्या फर्क आया…
इसका सीधा असर दलालों और फर्जी बुकिंग पर पड़ा है. सोशल मीडिया पर भी कई यात्रियों ने राहत की सांस ली है. जिन स्टेशनों पर पहले औसतन 10 टिकट तत्काल में बन पाते थे, वहां अब संख्या दोगुनी तक बढ़ी है. हालांकि, शुरुआत में ऑनलाइन टिकट कम बन पा रहे हैं. नई व्यवस्था से अधिकृत एजेंट प्रभावित हैं और वे इसका विरोध कर रहे हैं. जिस पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के तत्काल टिकट मिनटों में बुक हो जाते थे. उसमें भी तत्काल कोटे से अभी टिकट उपलब्ध है.
दरअसल, नई व्यवस्था के तहत अब अधिकृत एजेंट तत्काल बुकिंग शुरू होने के 30 बाद टिकट बुक कर सकता है. तब तक सीटें बचने की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी. रेलवे ने तत्काल कोटे में सीटों की संख्या में भी कटौती की है और इन्हें प्रीमियम तत्काल कोटे में दे दिया है. इसका मतलब यह हुआ कि जो सीट तत्काल बुकिंग में हजार रुपए में मिल रही थी, उसके लिए प्रीमियल तत्काल में तीन गुना तक पैसे चुकाने होंगे. नए नियम तत्काल और प्रीमियम तत्काल दोनों पर लागू होते हैं.
रेलवे ने क्या कहा…
रेल मंत्रालय का कहना है कि यह परिवर्तन आम यात्रियों को प्राथमिकता देने के लिए किया गया है. चूंकि पहले तत्काल टिकट का एक बड़ा हिस्सा एजेंटों और दलालों के जरिए कुछ ही मिनटों में बुक हो जाता था, जिससे जरूरतमंद यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाता था. अब आधार आधारित ओटीपी वेरिफिकेशन और एजेंट बुकिंग पर समयबद्ध प्रतिबंध के चलते यह व्यवस्था ज्यादा निष्पक्ष और पारदर्शी बन गई है.
















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